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सेंसेक्स 36 अंक नीचे और निफ्टी 10 पॉइंट ऊपर खुला, मंगलवार को अमेरिकी बाजार डाउ जोंस 390 अंक नीचे बंद हुआ था सप्ताह में आज बुधवार को कारोबार के तीसरे दिन सेंसेक्स 36.58अंक नीचे और निफ्टी 10.05पॉइंट ऊपर खुला। इससे पहले मंगलवार को बाजार बढ़त के साथ साथ बंद हुआ था। सुबह सेंसेक्स 421.76 अंक ऊपर और निफ्टी 138.45 पॉइंट ऊपर खुला। दिनभर की ट्रेडिंग के दौरान सेंसेक्स 710 अंक तक ऊपर जाने में कामयाब रहा। कारोबार के अंत में सेंसेक्स 167.19 अंक ऊपर 30,196.17 पर और निफ्टी 55.85 पॉइंट ऊपर 8,879.10 पर बंद हुआ था। अमेरिकी बाजार गिरावट के साथ बंद मंगलवार को भारतीय बाजारों के साथ कई देशों के बाजार गिरावट के साथ बंद हुए। अमेरिकी बाजार डाउ जोंस 1.59 फीसदी की गिरावट के साथ 390.51 अंक नीचे 24,206.90 पर बंद हुआ। वहीं, अमेरिका के दूसरे बाजार नैस्डैक 0.54 फीसदी गिरावट के साथ 49.72 अंक नीचे 9,185.10 पर बंद हुआ। दूसरी तरफ, एसएंडपी 1.05 फीसदी गिरावट के साथ 30.97 पॉइंट नीचे 2,922.94 पर बंद हुआ। चीन का शंघाई कम्पोसिट 0.37 फीसदी गिरावट के साथ 10.59 अंक नीचे 2,887.98 पर बंद हुआ। इधर इटली और फ्रांस के बाजार भी गिरावट के साथ बंद हुए, लेकिन जर्मनी के बाजार में बढ़त रही। कोरोना से देश और दुनिया में मौतें देश में कोरोना संक्रमितों की संख्या 1,06,475 हो गई है। इनमें 60,858 की रिपोर्ट पॉजीटिव है। वहीं 42,309 संक्रमित ठीक हो गए हैं। देश में अब तक कोरोना से मरने वालों की संख्या 3,302 हो चुकी है। ये आंकड़े covid19india.org के अनुसार हैं। दूसरी तरफ, दुनियाभर में कोरोनावायरस से संक्रमित लोगों की संख्या 4,986,332 हो चुकी है। इनमें 324,910 की मौत हो चुकी है। अमेरिका में कोरोना से मरने वालों की संख्या 93,533 हो चुकी है। 09:15 AMसेंसेक्स 162.94 अंक ऊपर 30,359.11 पर और निफ्टी 54.25 पॉइंट ऊपर 8,933.35 पर कारोबार कर रहा है। दुनियाभर के ज्यादातरबाजारों में रही गिरावट Download Dainik Bhaskar App to read Latest Hindi News Today BSE NSE Sensex Today | Stock Market Latest Update: May 20 Share Market, Trade BSE, Nifty, Sensex Live News Updates https://bit.ly/3cIFTR6

ई-पास के लिए सरकार ने लांच की नई वेबसाइट, 17 राज्य के लोगों को 5 भाषाओं में मिलेगी सुविधा देश में कोरोना वायरस के संक्रमण को रोकने के लिए लॉकडाउन का चौथा दौर शुरू हो गया है। लोगों को इस शहर दूसरे शहर जाने के लिए ई पास लेना होता है। सरकार ने ट्रैवल के लिए मूवमेंट पास अप्लाई करने के लिए नई वेबसाइट लॉन्च की है। इस वेबसाइट पर अभी 17 राज्यों के लिए ई-पास अप्लाई करने की सुविधा है। जो लोग किसी कारण से एक राज्य से दूसरे राज्य में ट्रैवल करना चाहते हैं तो नई सरकारी वेबसाइट पर अप्लाय कर सकते हैं। अलग-अलग कैटेगिरी में कर सकते हैं अप्लाय इस वेबसाइट से न केवल ई-पास के लिए अप्लाई कर सकते हैं बल्कि ई-पास ऐप्लिकेशन का स्टेटस भी जान सकते हैं। वेबसाइट पर दी गईं गाइडलाइन्स के मुताबिक, इन ई-पास को निश्चित ट्रैवल कैटिगरी के तहत अप्लाय किया जा सकता है। इनमें स्टूडेंट्स, जरूरी सर्विस प्रोवाइडर, टूरिस्ट, तीर्थयात्री, इमरजेंसी/मेडिकल ट्रैवल और शादी शामिल हैं। सभी जानकारी के साथ आपको यात्रा के कारण के लिए प्रूफ भी देना होता है। पास बनवाने की प्रोसेस? सबसे पहले https://bit.ly/2WJDvUB वेबसाइट पर जाएं। यह बेवसाइट हिंदी, अंग्रेज़ी, तेलुगू, असमी और मलयालम में उपलब्ध है। जैसे ही वेबसाइट ओपन होगी दो ऑप्शन आते हैं- ई-पास के लिए अप्लाई करें, अपनी एप्लीकेशन को ट्रैक करें। जिन्हें ई-पास के लिए अप्लाई करना है, उनके सामने राज्य को चुनने का ऑप्शन आएगा। उदाहरण के लिए, आप अगर भोपाल में रह रहे हैं, तो आपको मध्य प्रदेश चुनना होगा। फिर एक और लिंक मिलेगा, उस पर क्लिक करके आप राज्य के ई-पास वाले पेज पर चले जाएंग। मोबाइल नंबर रजिस्टर कराना होगा, OTP के ज़रिए उसका वेरिफिकेशन होगा. फिर एक फॉर्म खुलेगा. कुछ सवाल होंगे। नाम, पता, किस काम से जाना है, कहां जाना है। ये सब आपको भरना होगा. कुछ ज़रूरी दस्तावेज भी जमा करने होंगे। सारी जानकारी भरने के बाद जब आप फॉर्म जमा कर देंगे, तब वेबसाइट से जुड़े सरकारी अधिकारी आपका आवेदन देखेंगे। उसी के आधार पर फैसला होगा कि आपको पास दिया जाए या नहीं। ई-पास बनने पर आपको फोन पर मैसेज आएगा। यात्रा के दौरान ई-पास की एक सॉफ्ट / हार्ड कॉपी रखें। इसकी जरूरत पड़ सकती है। इसके अलावा आपका आवेदन किस स्टेज पर है, ये पता करने के लिए भी वेबसाइट पर ‘ट्रैक एप्लीकेशन’ वाला ऑप्शन है, वहां आप पता कर सकते हैं। Download Dainik Bhaskar App to read Latest Hindi News Today https://bit.ly/3cIFTR6

लॉकडाउन में छूट के बावजूद बेरोजगारी दर 24 फीसदी बढ़ी, अर्थव्यवस्था को सुधरने में लग सकता है काफी वक्त : CMIE देशव्यापी लॉकडाउन में छूट के बावजूद भारत में बेरोजगारी दर बढ़ती ही जा रही है। सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकोनॉमी (CMIE) के अनुसार 17 मई को खत्म हफ्ते में बेरोजगारी की दर 24 फीसदी रही है। रिपोर्ट में कहा गया है कि 17 मई को खत्म हफ्ते में बेरोजगारी की दर 24 फीसदी रही है, यह लगभग अप्रैल के जैसा ही है। यानी कि 20 अप्रैल से लॉकडाउन में ढील दिए जाने के बावजूद बेरोजगारी दर पर खास असर नहीं पड़ा है। हालांकि इस ढील का श्रम भागीदारी दर पर जरूर थोड़ा असर हुआ है। इसमें बढ़त हुई है जो कि 26 अप्रैल के हफ्ते में अब तक के सबसे निचले स्तर 35.4 फीसदी तक पहुंच गई थी। 17 मई के हफ्ते में यह बढ़कर 38.8 फीसदी तक पहुंच गई है। श्रमिकों के लिए रहेंगे मुश्किल भरे दिन CMIE रिपोर्ट के मुताबिक, अर्थव्यवस्था को सुधरने में काफी समय लग सकता है और श्रमिकों के लिए अभी आने वाले दिन मुश्किल भरे ही रहेंगें। ट्रांसपोर्ट सेवाएं शुरू होने के बाद कुछ आर्थिक गतिविधियां बढ़ने को लेकर संभावना जताई जा रही है। बेरोजगारी ने बनाया था रिकॉर्ड कोरोना संकट और लॉकडाउन की वजह से भारत में लोगों के रोजगार में जबरदस्त कमी आ गई है। इसके पहले सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकोनॉमी (CMIE) के अनुसार, 3 मई को खत्म हफ्ते में बेरोजगारी दर बढ़कर रिकॉर्ड 27.11 फीसदी तक पहुंच गई थी। यानी हर चार में से एक व्यक्ति बेरोजगार हो गया। यह देश में अब तक की सबसे ज्यादा बेरोजगारी की दर है। 84% से अधिक घरों में मासिक आमदनी में गिरावट हाल में जारी सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकोनॉमी कि रिपोर्ट के मुताबिक, भारत के 84 फीसदी से ज्यादा घरों की मासिक आमदनी में गिरावट दर्ज की गई है। देश में कामकाजी आबादी का 25% हिस्सा इस समय बेरोजगार हो चुका है। 2.70 करोड़ युवाओं की नौकरी गई सीएमआईई की स्टडी के मुताबिक देश में बेरोजगारी के आंकड़े भी तेजी से बढ़े हैं। 21 मार्च को भारत में बेरोजगारी की दर 7.4 फीसदी थी, जो 5 मई को बढ़कर 25.5 फीसदी हो गई है। स्टडी के मुताबिक देश में 20 से 30 साल आयु वर्ग के 2 करोड़ 70 लाख युवाओं को अप्रैल में नौकरी से हाथ धोना पड़ा है। Download Dainik Bhaskar App to read Latest Hindi News Today लाॅकडाउन में ढील के चलते श्रम भागीदारी दर में बढ़ोतरी हुई है https://bit.ly/3cIFTR6

देसी कंपनियों ने शुरू की ग्लोबल तैयारी, विस्तार के लिए नए प्लांट लगाने की योजनाएं बनाईं; अब रिसर्च पर भी रहेगा फोकस स्वदेशी उत्पाद खरीदने में ‘लोकल के लिए वोकल’ बनने की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अपील के बाद स्वदेशी कंपनियों में लोकल ब्रांड के लिए नई स्फूर्ति देखी जा रही है। स्थानीय उत्पादों की बढ़ती मांग के मद्देनजर कई कंपनियों ने अगले वित्त वर्ष से विस्तार की योजना भी बनाई है। साथ ही यह उम्मीद भी जताई है कि लॉकडाउन खत्म होने के बाद उनकी कंपनियों की स्थिति तेजी से ठीक होगी। मोबाइल हैंडसेट, चाय, साबुन, ऑटो और एफएमसीजी सेक्टर की कंपनियां अपने कारोबार के बारे में नए सिरे से सोच रहीं हैं और उसी के अनुसार अपनी योजनाएं बनाने में जुट गई हैं। ऐसा केवल देश में ही नहीं, अमेरिका में भी हो रहा है। देसी कंपनियों को सपोर्ट करने से अर्थव्यवस्था पुनर्जीवित होगी इस सिलसिले में पतंजलि आयुर्वेद के स्वामी रामदेव कहते हैं कि खाद्य तेलों से लेकर फूड प्रोडक्ट व एफएमसीजी में एक लाख करोड़ रुपए तक करने की भूमिका निभाने के लिए पतंजलि प्रतिबद्ध है। उनकेमुताबिक इससे 10 से 20 करोड़ लोगों को रोजगार मिलने की उम्मीद है। वहीं, घड़ी डिटरजेंट बनाने वाली कंपनी आरएसपीएल के ज्वाइंट एमडी राहुल ज्ञानचंदानी कहते हैं कि देश की अर्थव्यवस्था तभी पुनर्जीवित होगी, जब हम देसी कंपनियों को सपोर्ट करेंगे। हमारे 20 प्लांट हैं, खपत लगातार बढ़ रही है। जरूरत हुई तो हम एक और प्लांट लगाएंगे। कई कंपनियों नेब्रांडिंग की योजना भी बनाई इधर, कई कंपनियों ने अपनी ब्रांडिंग की योजना भी बनाई है। बाघ बकरी टी ग्रुप के एक्जीक्यूटिव डायरेक्टर पराग देसाई ने कहा कि हमारी चाय 40 देशों में बिकती है। हम और प्रचार करेंगे कि लोकल कंपनी होने के बाद भी हम आगे कैसे बढ़े। प्रधानमंत्री की अपील के बाद उम्मीद है कि हमारे उत्पाद की डिमांड भी बढ़ेगी। अभी स्टॉक की चाय ही बिक रही है, लेकिन बढ़ती मांग की पूर्ति के लिए एक साल बाद हम नया प्लांट लगाएंगे। वहीं, एक बड़ी ऑटो मोबाइल कंपनी के वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि पीएम की अपील और लेबर रिफॉर्म्स के साथ ही अन्य निर्णयों के जमीन पर उतरने के बाद भारतीय कंपनियों को न सिर्फ आगे बढ़ने में मदद मिलेगी बल्कि वे ग्लोबल भी बनेंगी। 40% अमेरिकियों ने कहा कि उन्हें चीन के बने उत्पाद नहीं चाहिए इधर, ब्लूमबर्ग की हालिया सर्वे रिपोर्ट के मुताबिक, 40% अमेरिकियों ने कहा कि उन्हें चीन के बने उत्पाद नहीं चाहिए जबकि 22% अमेरिकियों ने भारत में बने उत्पादों को भविष्य में खरीदने से मना किया है। ऐसे में भारतीय भी स्वदेशी उत्पाद खरीदने के लिए आगे आ सकते हैं। प्रोडक्ट और सर्विस विश्वस्तरीय देने से ही मुकाबला होगा विश्व की पांचवी सबसे बड़ी फीचर फोन बनाने वाली कंपनी लावा इंटरनेशनल के चेयरमैन और एमडी हरिओम राय कहते हैं कि कोई भी देश जो बड़ा बना है, वो सिर्फ इसलिए बड़ा हुआ है क्योंकि उनकी कंपनी बड़ी बनी है। कंपनियों को अपने प्रोडक्ट और सर्विस को विश्वस्तरीय करना पड़ेगा, तभी हम मल्टी नेशनल कंपनियों से मुकाबला कर पाएंगे। 19-20 का थोड़ा-बहुत फर्क होगा तो लोग स्थानीय प्रोडक्ट को ही पसंद करेंगे लेकिन यही अंतर 17-25 का होगा तो फिर स्थानीय होते हुए भी उत्पाद नहीं बिक सकेगा। नई पॉलिसी आने के बाद हम चीन से पूरा प्रोडक्ट शिफ्ट कर रहे हैं और भारत में ही आर एंड डी सेंटर सहित डिजाइन और निर्माण का काम भी यहीं कर रहे हैं। Download Dainik Bhaskar App to read Latest Hindi News Today चाय, साबुन, ऑटो और एफएमसीजी सेक्टर की कंपनियां अपने कारोबार के बारे में नए सिरे से सोच रहीं हैं और उसी के अनुसार अपनी योजनाएं बनाने में जुट गई हैं। -प्रतीकात्मक फोटो https://bit.ly/3cIFTR6

लॉकडाउन के बाद सैनिटाइजर की मांग 64% बढ़ी, यूपी सबसे ज्यादा रोजाना 2 लाख लीटर प्रोडक्शन कर 23 राज्यों को भेज रहा रिसर्च टीम. कोरोना के चलते पूरी दुनिया में हर कारोबार बुरी तरह प्रभावित हुआ है, लेकिन सैनिटाइजर का बाजार लगातार बढ़ता जा रहा है। लॉकडाउन के बाद से करीब 500 छोटी-बड़ी मैन्यूफैर्क्चस यूनिट इस सेक्टर में उतर चुकी हैं। इसमें 152 ऐसी कंपनियां हैं, जो साबुन, बॉडी, फेश और हैंड वॉश के साथ-साथ सैनिटाइजर का भी उत्पादन कर रही हैं। ऑल इंडिया डिस्टिलर्स एसोसिएशन (एआईडीए) के अनुसार 150 से अधिक डिस्टिलरी भी देश में सैनिटाइजर का उत्पादन कर रही हैं। देश में एल्कोहल बेस्ट सैनिटाइजर की मांग में 64% का इजाफा हुआ है। सबसे ज्यादा कंपनियां यूपी में बना रहीं सैनिटाइजर सबसे ज्यादा उत्तर प्रदेश में 85 चीनी मिलें, 12 डिस्टिलरी, 37 कंपनियां और 9 अन्य संस्थाएं प्रतिदिन 2 लाख लीटर सैनिटाइजर का निर्माण कर रही हैं। उत्तर प्रदेश सरकार के आंकड़ों के मुताबिक सात मई तक प्रदेश में 45 लाख 15 हजार लीटर सैनिटाइजर का उत्पादन हुआ, जिसमें से 19 लाख 31 हजार लीटर 23 राज्यों को सप्लाई किया गया है। एक साल इस सेक्टर का आकार 30 करोड़ रुपए बढ़ा निल्सन इंडिया के मुताबिक महामारी के बाद से भारत के सैनिटाइजर बाजार में चार गुना का इजाफा हुआ है। 2019 में मार्च महीने में इस सेक्टर का कुल कारोबार 10 करोड़ रुपए था। मार्च 2020 में 43 करोड़ रुपए का कारोबार हुआ। कोरोना वायरस का टीका न बनने की सूरत में अगले पांच साल में इस सेक्टर में 10-15 फीसदी की ग्रोथ की संभावना है। यूपी में अप्रैल में रोजाना2 लाख लीटर प्रोडक्शन हुआ उत्तर प्रदेश के गन्ना और चीनी आयुक्त संजय भूसरेड्डी के अनुसार मार्च में करीब 50 उत्पादन इकाइयां रोजाना 60 हजार लीटर सैनिटाइजर का उत्पादन करती थीं, लेकिन मांग बढ़ने के बाद कुछ और चीनी मिलें, डिस्टिलरी व अन्य संस्थाओं को अनुमति दी गई। जिससे प्रोडक्शन 2 लाख लीटर प्रतिदिन हो गया। लॉकडाउन के बाद से हरियाणा में सबसे ज्यादा सैनिटाइजर की खपत हुई। वहां पर 4.11 लाख लीटर सैनिटाइजर की सप्लाई की जा चुकी है। भारत में स्थिति- 152 नए निर्माताओं के आने से सैनिटाइजर बाजार की हिस्सेदारी का अनुपात 60-40 तक पहुंचा ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार सैनिटाइजर सेक्टर की शीर्ष तीन कंपनी रेकिट बेंकिसर इंडिया लिमिटेड, हिंदुस्तान यूनिलीवर लिमिटेड और हिमालया ड्रग कंपनी प्राइवेट लिमिटेड की बाजार हिस्सेदारी जनवरी और फरवरी में 85% से मार्च में गिरकर 39% हो गई। लॉकडाउन के बाद से देश में 152 नए निर्माताओं के आने से बाजार में हिस्सेदारी का अनुपात 60-40 तक पहुंच चुका है। आईटीसी लिमिटेड, डाबर इंडिया लिमिटेड, मैरिको लिमिटेड, इमामी लिमिटेड और ज्योति लेबोरेटरीज लिमिटेड जैसी कंपनियों ने भी तेजी से सैनिटाइजर का प्रोडक्शन शुरू किया है। यहां तक कि शराब बनाने वाली कंपनी डियाजियो इंडिया भी इस रेस में कूद पड़ी है। दुनिया में स्थिति- इस साल ग्लोबल सैनिटाइजर मार्केट का आकार 14 हजार करोड़ रुपए होने का अनुमान अमेरिका की मार्केट रिर्सच कंपनी फॉर्च्यून बिजनेस इनसाइट के विश्लेषण के मुताबिक 2020 में ग्लोबल सैनिटाइजर बाजार की वार्षिक वृद्धि दर 5.06% से बढ़कर 45.7% होने का अनुमान है। कोरोनावायरस के आउटब्रेक से पहले 2020 में सैनिटाइजर का बाजार करीब 10 हजार करोड़ रुपए होने का अनुमान था, जो अब बढ़कर करीब 14 हजार करोड़ रुपए होने की उम्मीद है। डब्ल्यूएचओ क्या कहता है? हर 2घंटे में हाथ धुलना या सैनिटाइजर के प्रयोग ही कोरोना का सबसे कारगर इलाज डब्ल्यूएचओ के अनुसार मौजूदा हालत में कोरोना महामारी से बचाव का सबसे सरल और सस्ता उपाय हर दो घंटे में हाथ धुलना या फिर एल्कोहल बेस्ड सैनिटाइजर का इस्तेमाल करना है। चिकित्सकों के अनुसार ऐसा करने से कोरोना का वायरस नष्ट हो जाता है और संक्रमण की संभावना क्षीण हो जाती है। भारत में उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय ने राज्य सरकारों को डिस्टलरीज और चीनी कंपनियों को लाइसेंस देने का निर्देश दिया था, ताकि मांग को पूरा करने के लिए हैंड सैनिटाइजर का निर्माण किया जा सके। Download Dainik Bhaskar App to read Latest Hindi News Today Coronavirus India (UP) Lockdown Updates; Hand Sanitizer Demand Increased Sixty-four Percent After Lockdown In Uttar Pradesh https://bit.ly/3cIFTR6

150 अंक ऊपर खुला सेंसेक्स शुरुआती ट्रेडिंग के दौरान 200 अंक तक गिरा, निफ्टी भी 63 पॉइंट नीचे सप्ताह में आज सोमवार को कारोबार के पहले दिन बाजार बढ़त के साथ खुला। सेंसेक्स 150.53अंक ऊपर और निफ्टी 21.45पॉइंट ऊपर खुला। हालांकि, ट्रेडिंग के पहले ही मिनट में सेंसेक्स में गिरावट आ गई।इससे पहले शुक्रवार को बाजार गिरावट के साथ बंद हुआ था। उस दिन सेंसेक्स 173.39 अंक ऊपर और निफ्टी 39.65 पॉइंट ऊपर खुला था। दिनभर की ट्रेडिंग के दौरान सेंसेक्स 352 अंक से ज्यादा नीचे लुढ़क गया। कारोबार के अंत में सेंसेक्स 25.16 अंक या 0.08% नीचे 31,097.73 पर और निफ्टी 5.90 पॉइंट या 0.06% नीचे 9,136.85 पर बंद हुआ था। शुक्रवार को बढ़त के साथ बंद हुए अमेरिकी बाजार शुक्रवार को अमेरिकी बाजारों के साथ अन्य देशों के बाजारों में भी बढ़त देखने को मिली। अमेरिकी बाजार डाउ जोंस 0.25 फीसदी की बढ़त के साथ 60.08 अंक ऊपर 23,685.40 पर बंद हुआ। वहीं, अमेरिका के दूसरे बाजार नैस्डैक 0.79 फीसदी बढ़त के साथ 70.84 अंक ऊपर 9,014.56 पर बंद हुआ। दूसरी तरफ, एसएंडपी 0.39 फीसदी बढ़त के साथ 11.20 पॉइंट ऊपर 2,863.70 पर बंद हुआ। चीन का शंघाई कम्पोसिट 0.45 फीसदी बढ़त के साथ 12.79 अंक ऊपर 2,881.25 पर बंद हुआ था। इधर फ्रांस, जर्मनी, कनाडा के बाजार भी बढ़त के साथ बंद हुए। कोरोना से देश और दुनिया में मौतें देश में कोरोना संक्रमितों की संख्या 95,698 हो गई है। इनमें 95,698 की रिपोर्ट पॉजीटिव है। वहीं 36,795 संक्रमित ठीक हो गए हैं। देश में अब तक कोरोना से मरने वालों की संख्या 3,025 हो चुकी है। ये आंकड़े covid19india.org के अनुसार हैं। दूसरी तरफ, दुनियाभर में कोरोनावायरस से संक्रमित लोगों की संख्या 4,801,875 हो चुकी है। इनमें 316,671 की मौत हो चुकी है। अमेरिका में कोरोना से मरने वालों की संख्या 90,978 हो चुकी है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने दिया 20 लाख करोड़ के पैकेज का हिसाब वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने रविवार को 20 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा के आत्मनिर्भर भारत पैकेज का पूरा हिसाब दिया। इस पैकेज की घोषणा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को की थी। इस पैकेज के अंदर इस घोषणा से पहले जारी किए जा चुके पैकेज भी शामिल हैं। पीएम की घोषणा के बाद वित्त मंत्री ने बुधवार से रविवार तक हर दिन अलग-अलग सेक्टर के लिए पैकेज और सुधारों की घोषणा कर रही थीं। रविवार को इसका पांचवां और आखिरी चरण था। पैकेज का चरण घोषित राशि (करोड़ रुपए में) बुधवार, 13 मई 2020 को वित्त मंत्री द्वारा घोषित पैकेज 5,94,550 गुरुवार, 14 मई को वित्त मंत्री द्वारा घोषित पैकेज 3,10,000 शुक्रवार, 15 मई को वित्त मंत्री द्वारा घोषित पैकेज 1,50,000 शनिवार और रविवार, 16 और 17 मई को वित्त मंत्री द्वारा घोषित पैकेज 48,100 प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना सहित पुराने पैकेज 1,92,800 आरबीआई के कदम, जो अब तक लागू हो चुके हैं 8,01,403 कुल 20,97,053 09:29 AMबीएसई सेंसेक्स के 23 में से 6 सेक्टर में बढ़त और 17 सेक्टर में गिरावटहै। 09:35 AM बीएसई सेंसेक्स के सभी 32 इंडेक्स में आज गिरावट है। 09:29 AM सेंसेक्स 211.97 अंक नीचे 30,885.76 पर और निफ्टी 63.90 पॉइंट नीचे 9,072.95 पर कारोबार कर रहा है। 09:23 AM बीएसई सेंसेक्स 30 में शामिल 8 कंपनियों के शेयरों में बढ़त और 22 कंपनियों के शेयर में गिरावट है। 09:15 AM सेंसेक्स 21.45 अंक नीचे 30,926.66 पर और निफ्टी 45.75 पॉइंट नीचे 9,091.10 पर कारोबार कर रहा है। शुक्रवार को विदेशी बाजारों का हाल Download Dainik Bhaskar App to read Latest Hindi News Today पिछले सप्ताह कारोबार के आखिरी दिन सेंसेक्स 25 अंक नीचे 31,097 पर बंद हुआ था, वहीं आज ये 150 अंक ऊपर खुला है https://bit.ly/3cIFTR6

खराब फास्टैग वाले वाहनों से वसूला जाएगा दोगुना टोल टैक्स, सड़क परिवहन मंत्रालय ने बदला कानून केंद्र सरकार ने फास्टैग से जुड़े एक नियम में बड़ा बदलाव किया है। सरकार ने कहा है कि अब अवैध या खराब फास्टैग वाले वाहनों से नेशनल हाईवे पर दोगुना टोल टैक्स वसूला जाएगा। इससे पहले केवल ऐसे वाहनों से दोगुना टोल टैक्स वसूला जाता था जो फास्टैग कार्ड के बिना फास्टैग वाली लाइन में घुस जाते थे। सड़क परिवहन मंत्रालय ने जारी किया नोटिफिकेशन टोल टैक्स वसूली से जुड़े नियम में हुए बदलाव को लेकर सड़क परिवहन मंत्रालय ने नोटिफिकेशन जारी कर दिया है। नोटिफिकेशन में कहा गया है कि यदि कोई वाहन बिना फास्टैग या खराब फास्टैग के साथ फास्टैग लाइन में घुसेगा तो उसे दोगुना टोल टैक्स देना होगा। केंद्र सरकार ने नेशनल हाईवे फी रूल्स के तहत किया है। मई की शुरुआत तक 1.68 करोड़ फास्टैग जारी केंद्र सरकार ने टोल प्लाजा पर आवागमन को सुगम बनाने और डिजिटल ट्रांजेक्शन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से 15 दिसंबर 2019 से सभी वाहनों के लिए फास्टैग को अनिवार्य कर दिया है। एक अनुमान के मुताबिक मई 2020 की शुरुआत तक पूरे देश में करीब 1.68 करोड़ फास्टैग जारी हो चुके हैं। फास्टैग से अपने आप हो जाता है टोल टैक्स का भुगतान रेडियो फ्रीक्वेंस आईडेंटिफिकेशन (आरएफआईडी) तकनीक पर काम करने वाला फास्टैग प्रीपेड या यूजर के बचत खाते से जुड़ा होता है जो नेशनल हाईवे पर अपने आप टोल का भुगतान कर देता है। यह फास्टैग वाहन की विंडस्क्रीन पर लगा होता है। इसके जरिए मानव संपर्क में आए बिना टोल टैक्स का भुगतान हो जाता है। क्रेडिट कार्ड, यूपीआई से लिंक कर सकते हैं फास्टैग नेशनल हाईवे पर टोल भुगतान के लिए वाहनों पर लगाये जाने वाले फास्टैग को क्रेडिट कार्ड और यूपीआई से भी लिंक किया जा सकता है। जनवरी 2020 में आरबीआई ने इसको मंजूरी दी थी। इससे पहले केवल बैंक खातों और प्रीपेड माध्यमों से फास्टैग को लिंक करने की अनुमति थी। नेशनल पेमेंट कॉरपोरेशन इन प्लेटफार्मों के ऑपरेटरों से प्राप्त अनुरोधों को स्वीकृति देगा और उन्हें फास्टैग से लिंक करने की सुविधा प्रदान करेगा। Download Dainik Bhaskar App to read Latest Hindi News Today केंद्र सरकार ने टोल प्लाजा पर आवागमन को सुगम बनाने और डिजिटल ट्रांजेक्शन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से 15 दिसंबर 2019 से सभी वाहनों के लिए फास्टैग को अनिवार्य कर दिया है https://bit.ly/3cIFTR6

निवेश और बचत हैं बहुत जरूरी, इसलिए नई की वजाय चुनें पुरानी टैक्स व्यवस्था वित्त वर्ष 2020-21 से आयकरदाता दो व्यवस्थाओं में से किसी एक चुनाव कर सकते हैं। एक है पुरानी व्यवस्था और दूसरी नई कर व्यवस्था। नई व्यवस्था सरल है, लेकिन इसमें आपके निवेश/खर्च के लिए लगभग जीरो छूट मिलती है।अर्चित गुप्ता सीईओ, क्लियर टैक्स के अनुसार नई कर व्यवस्था पुराने की तुलना में कम दर की पेशकश करती है। कर की दर पर शुद्ध गणना के आधार पर नई कर व्यवस्था विभिन्न स्तरों पर हजारों रुपए का कर बचाती है। हालांकि, दोनों व्यवस्थाओं में कर का वास्तविक अंतर तभी सामने आता है, जब हम दोनों व्यवस्थाओं में कर की दर के अलावा मिलने वाली कटौती और छूट का साथ आकलन करें। यहां यह जानना जरूरी है कि नीचे दी गई छूट या कटौतियां नई कर व्यवस्था में नहीं मिलेंगी। वेतन पर मानक कटौती, प्रोफेशनल टैक्स और मनोरंजन भत्ता। एलटीए, एचआरए, माइनर चाइल्ड इनकम अलाउंस और अन्य। खाली पड़ी संपत्ति पर होम लोन का ब्याज। चैप्टर VI-A कटौती के तहत कर बचाने वाले निवेश-भुगतान। किसी दूसरे अनुलाभ या भत्ते के लिए छूट या कटौती। पारिवारिक पेंशन आय से होनी आमदनी में छूट। हाउस प्रॉपर्टी पर होने वाले नुकसान पर छूट। हालांकि, नई कर व्यवस्था में टैक्स छूटके लिए कुछ निश्चित भत्तों का आप दावा कर सकते है, जैसे दिव्यांग व्यक्ति को यातायात भत्ते में छूट आदि। नई कर व्यवस्था कर कटौती/छूट गणना की परेशानी से बचते हुए आसानी से कर भरने का विकल्प है। हालांकि, यदि आप भविष्य के लिए निवेश करना, बचत करना या घर खरीद कर छूट का दावा करना चाहते हैं तो ये विकल्प आपके लिए नहीं है। पुरानी कर व्यवस्था में आप निवेश से कर की बचत कर सकते हैं। घर खरीदने पर टैक्स छूट मिलती है। स्वास्थ्य बीमा और दूसरे मेडिकल खर्च पर छूट का दावा कर सकते हैं। दूसरी ओर, नई कर व्यवस्था भविष्य में बिना किसी सुरक्षित बचत के आपको अतिरिक्त धन के साथ छोड़ देती है। Download Dainik Bhaskar App to read Latest Hindi News Today दोनों व्यवस्थाओं में कर का वास्तविक अंतर तभी सामने आता है, जब हम दोनों व्यवस्थाओं में कर की दर के अलावा मिलने वाली कटौती और छूट का साथ आकलन करें https://bit.ly/3cIFTR6

इसी सप्ताह लॉन्च हो सकती है एमएसएमई को 3 लाख करोड़ रुपए के लोन की गारंटी स्कीम, 9.25% होगा ब्याज कोरोना आपदा से निपटने के लिए सरकार के लिए सरकार ने प्रोत्साहन पैकेज की घोषणा की है। इस पैकेज में माइक्रो, स्मॉल एंड मीडियम एंटरप्राइजेज (एमएसएमई) के लिए तीन लाख करोड़ रुपए की गारंटी स्कीम का ऐलान किया गया है। एक वरिष्ठ बैंक अधिकारी के मुताबिक यह स्कीम इसी सप्ताह लॉन्च हो सकती है। 9.25 फीसदी के आसपास होगा ब्याज बैंक अधिकारी ने पीटीआई से बातचीत में कहा कि एमएसएमई को यह कोलैटरल फ्री (बिना गिरवी) लोन बैंकों की ओर से 9.25 फीसदी की आकर्षित ब्याज दर पर उपलब्ध कराए जा सकते हैं। मौजूदा समय में बैंक जोखिम को ध्यान में रखते हुए एमएसएमई सेक्टर को 9.5 फीसदी से लेकर 17 फीसदी तक की विभिन्न ब्याज दरों पर लोन उपलब्ध कराते हैं। बैंक अधिकारी ने कहा कि नॉन-बैंकिंग फाइनेंस कंपनीज (एनबीएफसी) की ओर से दिए जाने वाले लोन पर अधिकतम 14 फीसदी की ब्याज दर की कैपिंग लगाई जा सकती है। वित्त मंत्री ने 13 मई को की थी घोषणा वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 20 लाख करोड़ रुपए के कोरोना राहत पैकेज की 5 किस्तों में घोषणा की है। इसी के तहत 13 मई को पहली किस्त में वित्त मंत्री ने छोटे कारोबारियों को राहत देने के मकसद से आउटस्टैंडिंग क्रेडिट के 20 फीसदी के बराबर अतिरिक्त वर्किंग कैपिटल भी देने की घोषणा की थी। यह अतिरिक्त वर्किंग कैपिटल सस्ती ब्याज दरों पर टर्म लोन के रूप में दी जाएगी। यह लोन 25 करोड़ तक की आउटस्टैंडिंग और 100 करोड़ तक टर्नओवर वाले कारोबारियों को दिया जाएगा। यूनिट्स को नहीं देनी गारंटी वित्त मंत्री ने बताया कि केंद्र सरकार के इस उपाय से एमएसएमई को करीब 3 लाख करोड़ रुपए की लिक्विडिटी उपलब्ध होगी। इस पूरी राशि की गारंटी केंद्र सरकार देगी। इसके लिए एमएसएमई यूनिट्स को किसी भी प्रकार की कोई गारंटी या कुछ भी गिरवी नहीं रखना होगा। इससे करीब 45 लाख एमएसएमई लाभान्वित होंगे। यह लोन चार साल की अवधि के लिए होगा। इसमें प्रिंसीपल पुनर्भुगतान पर 12 महीने का मोराटोरियम भी मिलेगा। इस स्कीम का लाभ लेने के लिए 31 अक्टूबर 2020 तक आवेदन किया जा सकता है। देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है एमएसएमई एमएसएमई सेक्टर की देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ माना जाता है। इस सेक्टर का देश की जीडीपी में करीब 28 फीसदी और कुल निर्यात में करीब 40 फीसदी का योगदान है। देश में यह सेक्टर कृषि के बाद सबसे ज्यादा करीब 11 करोड़ लोगों को रोजगार देता है। इसके अलावा लोन डिफाल्ट वाली एमएसएमई को राहत देने के लिए 20 हजार करोड़ के सबोर्डिनेट कर्ज का ऐलान किया गया है। इससे करीब 2 लाख कारोबारी लाभान्वित होंगे। इसके अलावा एमएसएमई के लिए एक फंड्स का फंड भी बनाया जाएगा। सरकार इसमें 50000 करोड़ इक्विटी डालेगी। बदली जाएगी एमएसएमई की परिभाषा इसके अलावा ज्यादा से ज्यादा निवेश का आकर्षित करने के लिए सरकार एमएसएमई की परिभाषा में भी बदलाव करेगी। इसके लिए सरकार एक टर्नओवर मापदंड पेश करेगी, जिससे ज्यादा से ज्यादा कंपनियां राजकोषीय और अन्य लाभ लेने के लिए छोटे कारोबारी के तौर पर बनी रहेंगी। इसके अलावा सरकार ने एमएसएमई की मदद के लिए 200 करोड़ तक की सरकारी खरीद की घरेलू कारोबारियों के लिए सीमित कर दिया है। अब इसके लिए ग्लोबल टेंडर नहीं मंगाए जाएंगे। Download Dainik Bhaskar App to read Latest Hindi News Today एमएसएमई सेक्टर की देश की जीडीपी में करीब 28 फीसदी और कुल निर्यात में करीब 40 फीसदी की हिस्सेदारी है https://bit.ly/3cIFTR6

लॉकडाउन और उतार-चढ़ाव से भरे बाजार में भी जारी रखें निवेश, लेकिन अपनाएं सही रणनीति दुनियाभर की अर्थव्यवस्था पर कोविड-19 का बेहद नकारात्मक असर पड़ा है। इसका अंदाजा इससे लगा सकते हैं कि वैश्विक जीडीपी वृद्धि दर में भारी कमी आ चुकी है। भारत में भी वृद्धि दर कम रहने की आशंका है। हालांकि भारत सकारात्मक वृद्धि दर देखने वाले चुनिंदा देशों में होगा। राजीव बजाज, चेयरमैन और प्रबंध निदेशक बजाज कैपिटलकहते हैं किसकारात्मक आर्थिक प्रभाव को नियंत्रित करने के लिए सरकार ने 20 लाख करोड़ रुपए के राहत पैकेज की घोषणा की है, जो देश की जीडीपी का लगभग 10% है। ज्यादातर उपायों का उद्देश्य अर्थव्यवस्था के विभिन्न क्षेत्रों को तरलता प्रदान करना है और साथ ही साथ भारतीय व्यवसायों और देश को ज्यादा आत्मनिर्भर बनाना है। इस साल की शुरुआत से ही गिरावट 2020 की शुरुआत से ही, देश का शेयर बाजार लगभग 20% तक नीचे चला गया है और इक्विटी म्युचुअल फंड निवेशक बेसब्री से तेज वापसी का इंतजार कर रहे हैं, जो बहुत हद तक इस पर निर्भर करेगा कि अर्थव्यवस्था में किस प्रकार की रिकवरी होगी और खपत से जुड़ी मांग वापस कितनी तेजी से आएगी। आगे की राह भी हो सकती है उतार-चढ़ाव भरी इस बीच, भारत में आरबीआई सहित दुनिया भर के केंद्रीय बैंकों ने अर्थव्यवस्था में प्राण फूंकने के लिए राहत उपायों की घोषणा की है। आगे की राह उतार-चढ़ाव भरी हो सकती है, लेकिन सही योजना से, निवेशकों के लिए शेयर बाजार के उतार-चढ़ाव के अनुसार चलना आसान हो सकता है। यहां पर कुछ टिप्स दिए गए हैं, जिनकी जानकारी हर निवेशक को होना जरूरी है, ताकि वे इस समय का सर्वोत्तम उपयोग कर सकें और दीर्घकालिक वित्तीय लक्ष्यों से भटकने से बच सकें। पूंजी आवंटन को बनाए रखना लंबी अवधि में पैसा बनाने की कुंजी सबसे अच्छे वित्तीय योजनाकारों ने बार-बार कहा कि पूंजी-आवंटन को बनाए रखना ल‍ंबी अवधि में पैसा बनाने की कुंजी है। इस समय यह स्पष्ट हो गया है क्योंकि इक्विटी पोर्टफोलियो में काफी गिरावट आई है। इक्विटी, डेट और थोड़ा बहुत सोने वाला संतुलित पोर्टफोलियो रखने वाले ही शेयर बाजार की मंदी के सामने टिक पाएंंगे। विविधता को अपनाना निवेश में विविधता सफलता की कुंजी है। अगर एक ही एसेट में पूंजी लगा रहे हैं तो उसमें भी निवेश को विविधता देनी चाहिए। शेयर बाजार का उदाहरण लें, तो अलग-अलग सेक्टर और शेयर में पैसे लगाने चाहिए। वर्तमान परिस्थितियों में नई लहर आने से पहले लार्ज-कैप और मिड-कैप फंड्स में पर्याप्त निवेश कर लेना चाहिए। देश के जोखिम से बचने के लिए निवेशक अंतर्राष्ट्रीय फंड्स पर भी विचार कर सकते हैं। सोना खरीदने गोल्ड फंड्स में निवेश किया जा सकता है। और गिरावट का इंतजार न करें शेयर बाजार के स्तर आकर्षक लग सकते हैं क्योंकि कुछ शेयरों में अभी 50% तक की गिरावट आ चुकी है। हालांकि, बाजार की चाल पकड़ने की कोशिश न करें, क्योंकि दुनियाभर के अच्छे से अच्छे निवेशक बाजार के सबसे निचले स्तर का पता लगाने में लगातार असफल रहे हैं। बेहतर यही है कि साप्ताहिक या मासिक एसटीपी (सिस्टमैटिक ट्रांसफर प्लान) का चयन करें और अधिक गिरावट का इंतजार न करें क्योंकि मन-मुताबिक या प्रत्याशित गिरावट कभी नहीं आती है। एसआईपी को जारी रखें यदि आप कहीं इसको लेकर चिंतित है कि एसआईपी जारी रखें या नहीं, तो ये निर्णय लेना बिल्कुल भी मुश्किल नहीं है। बाजार अस्थिरता दिखा रहे हैं और जब भी बाजार गिरते हैं, निवेशकों को निवेश किए गए उतने ही पैसे में ज्यादा यूनिट्स मिलती है। जब बाजार वापस चढ़ता है तो इन यूनिट्स का मूल्य भी बढ़ता है। यदि आपके लक्ष्य दीर्घकालिक हैं तो मौजूदा बाजार एमएफ यूनिट्स को बनाए रखने की औसत लागत का शानदार अवसर दे रहा है। बाहर निकलने की रणनीति व्यक्ति को निवेश करते समय बाजार की चाल पकड़ने की कोशिश से बचना चाहिए। इक्विटी बाजारों से बाहर निकलते समय अपनी निकासी की योजना बनाना अहम होता है। आपका लक्ष्य आने के कम से कम तीन साल पहले फंड्स को इक्विटी से डेट फंड्स में शिफ्ट करते हुए जोखिम घटाने की प्रक्रिया शुरू कर देनी चाहिए। ऐसे व्यक्तियों के लिए, जिनका लक्ष्य 2020 में पूरा हो रहा है, उन्हें जोखिम कम करने की रणनीति 2016-17 के आस-पास बनानी शुरू कर देनी चाहिए थी। Download Dainik Bhaskar App to read Latest Hindi News Today याद रखें, पूंजी का अच्छी विविधता के साथ इक्विटी और बॉन्ड्स के अलावा सोना और नकदी में आवंटन ही आपको ऐसे माहौल में बचाने में मदद कर सकता है। आखिरकार, यह आपका पैसा है और समय आने पर इसे अच्छे उपयोग में लगाने के लिए आपको इसकी देखभाल करनी होगी https://bit.ly/3cIFTR6

रिलायंस इंडस्ट्रीज के जियो प्लेटफॉर्म्स में 6,598.38 करोड़ रुपए निवेश करेगी जनरल अटलांटिक, 1.34 फीसदी हिस्सेदारी लेगी रिलायंस इंडस्ट्र्रीज ने रविवार को कहा कि वह अपनी डिजिटल इकाई की 1.34 फीसदी हिस्सेदारी वैश्विक इक्विटी कंपनी जनरल अटलांटिक को बेचेगी। इस सौदे से रिलायंस इंडस्ट्रीज (आरआईएल) को 6,598.38 करोड़ रुपए हासिल होंगे। चार सप्ताह से भी कम समय में आरआईएल ने निवेश हासिल करने के चार सौदे की घोषणा कर दी है। रिलायंस इंडस्ट्र्रीज ने एक बयान में कहा कि इन चार सौदों से उसे 67,194.75 करोड़ रुपए का फंड हासिल होगा। इससे कंपनी को अपना कर्ज कम करने में मदद मिलेगी। जियो प्लेटफॉम्स बनी 5.16 लाख करोड़ रुपए की कंपनी कंपनी ने एक बयान में कहा कि इस नए निवेश में जियो प्लेटफॉर्म्स का इक्विटी मूल्य 4.91 लाख करोड़ रुपए और एंटरप्राइज वैल्यू 5.16 लाख करोड़ रुपए आंका गया है। जनरल अटलांटिक के निवेश के बाद जियो प्लेटफॉर्म में उसकी 1.34 फीसदी हिस्सेदारी हो जाएगी। जियो प्लेटफॉर्म्स देश की सबसे नई और सबसे बड़ी टेलीकॉम कंपनी रिलायंस जियो इंफोकॉम का संचालन करती है। फेसबुक ने पिछले महीने जियो प्लेटफॉर्म्स में 43,574 करोड़ रुपए का निवेश किया था इससे पहले फेसबुक ने 22 अप्रैल को जियो प्लेटफॉर्म्स में 43,574 करोड़ रुपए का निवेश कर 9.99 फीसदी हिस्सेदारी लेने का सौदा किया था। इसके कुछ ही दिनों बाद दुनिया की सबसे बड़ी टेक्नोलॉजी निवेशक कंपनी सिल्वर लेक ने 5,665.75 करोड़ रुपए का निवेश कर जियो प्लेटफॉर्म्स में 1.15 फीसदी हिस्सेदारी लेने का सौदा किया। अमेरिका की कंपनी विस्टा इक्विटी पार्टनर्स ने 8 मई को 11,367 करोड़ रुपए का निवेश कर जियो प्लेटफॉर्म्स में 2.32 फीसदी हिस्सेदारी खरीद ली। जियो प्लेटफॉर्म्स में रणनीतिक और वित्तीय निवेशकों की 20 फीसदी हिस्सेदारी होगी। इन 4 सौदों के जरिये रिलायंस ने जियो प्लेटफॉर्म्स की 14.8 फीसदी हिस्सेदारी बेच दी है। निकट भविष्य में और ऐसे निवेश की घोषणा हो सकती है। इस साल दिसंबर तक कर्ज मुक्त कंपनी बन सकती है रिलायंस इंडस्ट्रीज रिलायंस इंडस्ट्र्रीज के चेयरमैन व मैनेजिंग डायरेक्टर मुकेश अंबानी ने पिछले साल अगस्त में आरआईएल को मार्च 2021 तक नेट आधार पर कर्ज मुक्त कंपनी बनाने का लक्ष्य तय किया था। फेसबुक सौदा, 53,125 करोड़ रुपए के राइट्स इश्यू, निजी इक्विटी निवेश और सऊदी अरैमको सहित कई और कंपनियों को हिस्सेदारी बेचे जाने से कर्ज मुक्ति का लक्ष्य इस साल दिसंबर में ही पूरा हो जाने की उम्मीद है। रिलायंस इंडस्ट्र्रीज पर मार्च में था 1,61,035 करोड़ रुपए का शुद्ध कर्ज मार्च तिमाही के अंत में रिलायंस पर 3,36,294 करोड़ रुपए का कर्ज बकाया था। उस समय कंपनी के पास 1,75,259 करोड़ रुपए की नकदी थी। कर्ज को नकदी के साथ एडजस्ट करने के बाद कंपनी का नेट कर्ज 1,61,035 करोड़ रुपए था। कंपनी पर जो कर्ज बकाया है, उसमें से 2,62,000 करोड़ रुपए का कर्ज रिलायंस के बैलेंसशीट पर है और 23,000 करोड़ रुपए का कर्ज जियो पर है। जियो प्लेटफॉर्म्स रिलायंस इंडस्ट्रीज की संपूर्ण अधिनस्थ सहायक कंपनी है। यह अगली पीढ़ी की टेक्नोलॉजी कंपनी है। रिलायंस जियो इंफोकॉम जियो प्लेटफॉर्म्स की पूरी तरह से अधिनस्थ सहायक कंपनी है। जियो इंफोकॉम के 38.8 करोड़ उपभोक्ता हैं। जनरल अटलांटिक ने फेसबुक व अलीबाबा जैसी कंपनियों में भी किया है निवेश जनरल अटलांटिक दुनिया की एक बड़ी ग्लोबल ग्रोथ इक्विटी कंपनी है। वह करीब 40 साल से टेक्नोलॉजी, कंज्यूमर, फाइनेंशियल सर्विसेज और हेल्थकेयर सेक्टर की कंपनियों में निवेश कर रही है। उसने दुनियाभर में कई डिसरप्टिक कंपनियों में निवेश किया है। ऐसी कंपनियों में एयरबीएनबी, अलीबाबा, एंट फाइनेंशियल, बॉक्स, बाइटडांस, फेसबुक, स्लैक, स्नैपचैट, उबर जैसी कई कंपनियां शामिल हैं। आरआईएल के सीएमडी मुकेश अंबानी ने कहा कि मैं कई दशक से जनरल अटलांटिक को जानता हूं। भारत के विकास संभावना में उसके विश्वास के लिए मैं उसका प्रशंसक रहा हूं। जनरल अटलांटिक की वैश्विक विशेषज्ञता और टेक्नोलॉजी कंपनियों में 40 साल के निवेश का लाभ जियो को मिलने को लेकर हम उत्साहित हैं। भारत में डिजिटल क्रांति की अगुआई कर रही है जियो जनरल अटलांटिक के सीईओ बिल फोर्ड ने कहा कि मुकेश की इस सोच से हम सहमत हैं कि डिजिटल कनेक्टिविटी में देश की अर्थव्यवस्था में भारी तेजी लाने की क्षमता है। जनरल अटलांटिक लंबे समय से संस्थापकों के साथ डिसरप्टिव कारोबार के विकास के लिए काम कर रही है। जियो भी भारत में डिजिटल क्रांति की अगुआई कर रही है। Download Dainik Bhaskar App to read Latest Hindi News Today जनरल अटलांटिक के इस नए निवेश में जियो प्लेटफॉर्म्स का इक्विटी मूल्य 4.91 लाख करोड़ रुपए और एंटरप्राइज वैल्यू 5.16 लाख करोड़ रुपए आंका गया है https://bit.ly/3cIFTR6

केंद्र ने राज्यों की कर्ज सीमा को 6.41 लाख करोड़ रुपए से बढ़ाकर 10.68 लाख करोड़ रुपए किया कोरोनावायरस से लड़ने के लिए केंद्र सरकार ने रविवार को राज्यों की कर्ज लेने की सीमा को 6.41 लाख करोड़ रुपए से बढ़ाकर 10.68 लाख करोड़ रुपए कर दी। हालांकि केंद्र ने अधिक कर्ज लेने के लिए राज्यों पर कुछ शर्तें भी लगा दीं। इन शर्तों के तहत राज्यों को अधिक कर्ज लेने के लिए केंद्र द्वारा तय किए गए कुछ सुधारों को लागू करना होगा। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण राज्यों की कर्ज सीमा को बढ़ाने की घोषणा रविवार को 20 लाख करोड़ रुपए के आत्मनिर्भर भारत पैकेज के पांचवें और अंतिम चरण का ब्योरा देते हुए की। नई कर्ज सुविधा का पूरा ब्योरा संक्षेप में क्या मिला :राज्यों को जीएसडीपी के दो फीसदी के बराबर अतिरिक्त कर्ज लेने की सुविधा। यह 4.27 लाख करोड़ रुपए के बराबर राशि है। यानी कर्ज सीमा 6.41 लाख करोड़ रुपए से बढ़कर 10.68 लाख करोड़ रुपए हो गई। किसे मिला :केंद्र द्वारा निर्धारित शर्त का पालन करने वाले राज्यों को। कैसे मिलेगा :हर राज्य कर्ज को 3 फीसदी से बढ़ाकर 3.5 फीसदी तक ले सकता है। इससे अधिक कर्ज लेने के लिए 4 शर्तें लगाई गई हैं। हर एक शर्त पूरी करने पर 0.25 फीसदी अधिक कर्ज लेने की सुविधा मिलेगी। कम से कम 3 शर्तों का पालन करने पर प्रोत्साहन के रूप में जीएसडीपी के 0.50 फीसदी के बराबर और कर्ज लेने की सुविधा मिलेगी। क्या है समय सीमा :अधिक कर्ज लेने की सुविधा सिर्फ चालू कारोबारी साल के लिए ही है। चालू कारोबारी साल में भी जैसे जैसे राज्य शर्त पूरी करेंगे, वैसे-वैसे कर्ज लेने की अधिक सुविधा मिलती जाएगी। राज्यों को इन 4 क्षेत्रों में सुधार करने होंगे वन नेशन वन राशन कार्ड ईज ऑफ डुइंग बिजनेस बिजली वितरण शहरी स्थानीय निकाय का राजस्व कर्ज सीमा को जीएसडीपी के 3% से बढ़ाकर 5% फीसदी कर दिया गया वित्त मंत्री ने राज्यों की कर्ज सीमा को ग्रॉस स्टेट डोमेस्टिक प्रोडक्ट (जीएसडीपी) के वर्तमान 3 फीसदी से बढ़ाकर 5 फीसदी कर दिया। यह बढ़ोतरी सिर्फ चालू कारोबारी साल 2020-21 के लिए ही की गई है। फिस्कल रिस्पांसिबिलिटी एंड बजट मैनेजमेंट कानून (एफआरबीएम) में राज्यों के कर्ज लेने की अधिकतम सीमा तय की गई है। इस सीमा से अधिक कर्ज लेने के लिए राज्यों को केंद्र से अनुमति लेनी होती है। अधिक कर्ज लेने के लिए करना होगा शर्तों का पालन अधिक कर्ज लेने के लिए राज्यों को सरकार द्वारा तय की गई शर्तों का पालन करना होगा। वित्त मंत्री के मुताबिक 0.5 फीसदी अधिक कर्ज लेने के लिए किसी शर्त का पालन जरूरी नहीं है। यानी बिना किसी शर्त का पालन किए राज्य अपनी कर्ज सीमा को वर्तमान 3 फीसदी से बढ़ाकर 3.5 फीसदी तक ले जा सकते हैं। इसके ऊपर एक फीसदी अधिक कर्ज लेने के लिए केंद्र ने शर्त लगा दी है। इसके तहत राज्यों को चार सुधार करने होंगे। हर सुधार के साथ राज्य को 0.25 फीसदी अतिरिक्त कर्ज लेने की सुविधा मिलेगी। इस तरह से सभी चार सुधार करने से राज्य 1 फीसदी अतिरिक्त कर्ज ले सकेंगे। इस तरह से शर्त पूरी करने वाले राज्य की कर्ज सीमा 3.5 फीसदी से और बढ़कर 4.5 फीसदी हो जाएगी। चार में से कम से कम 3 सुधार करने वाले को केंद्र प्रोत्साहन के तौर पर 0.5 फीसदी अतिरिक्त कर्ज लेने की सुविधा देगा। इस तरह से जो राज्य सभी चार सुधार कर लेंगे, उसकी कर्ज की सीमा 4.5 फीसदी से बढ़कर 5 फीसदी हो जाएगी। जो राज्य 3 सुधार पूरे करेंगे, उसकी कर्ज सीमा 4.25 फीसदी से बढ़कर 4.75 फीसदी पर पहुंच जाएगी। Download Dainik Bhaskar App to read Latest Hindi News Today राज्यों की कर्ज लेने की सीमा को सिर्फ चालू कारोबारी साल 2020-21 के लिए ही बढ़ाया गया है https://bit.ly/3cIFTR6

20 लाख करोड़ के भारी-भरकम पैकेज में भी खाली हाथ रहा टेलीकॉम सेक्टर, सीओएआई ने जताई नाराजगी केंद्र सरकार ने कोरोना आपदा से निपटने के लिए 20 लाख करोड़ रुपए से अधिक के भारी-भरकम राहत पैकेज का ऐलान कर दिया है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने इस मेगा राहत पैकेज की विस्तार से जानकारी दे दी है। रविवार को इस पैकेज की अंतिम किस्त की जानकारी दी गई, जिसमें कुल 8 घोषणाएं की गईं। इसमें मनरेगा, स्वास्थ्य, कारोबार, कंपनी एक्ट, ईज ऑफ डूइंग बिजनेस, पब्लिक सेक्टर एंटरप्राइजेज और राज्य सरकारों से जुड़ी घोषणाए शामिल थीं। टेलीकॉम सेक्टर के लिए कुछ नहीं केंद्र सरकार की ओर से घोषित किए गए मेगा राहत पैकेज में डिफेंस, कोल, पावर, हेल्थ, ऐजुकेशन, फार्मा समेत अधिकांश सेक्टरों के लिए हजारों-लाखों करोड़ रुपए की घोषणाएं की गई हैं। सबसे ज्यादा फोकस माइक्रो, स्मॉल एंड मीडियम एंटरप्राइजेज (एमएसएमई) सेक्टर पर फोकस किया गया है। इस सेक्टर को 3 लाख करोड़ रुपए की लोन क्रेडिट गारंटी के अलावा कई अन्य उपायों की घोषणा की गई है। लेकिन कर्ज के बोझ तले दबे टेलीकॉम सेक्टर के लिए इस मेगा राहत पैकेज में कोई घोषणा नहीं की गई है। टेलीकॉम सेक्टर के लिए इस पैकेज में कोई प्रावधान नहीं किया गया है। सीओएआई ने जताई नाराजगी सेल्यूलर ऑपरेटर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (सीओएआई) ने इस मेगा राहत पैकेज में टेलीकॉम सेक्टर के लिए कुछ भी प्रावधान नहीं करने पर नाराजगी जताई है। सीओएआई ने कहा कि टेलीकॉम इंडस्ट्री लंबे समय से लाइसेंस फीस और अन्य लेवी में कटौती की मांग करती आ रही है लेकिन वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने इस सेक्टर के लिए किसी भी उपाय की घोषणा नहीं की है। हमारी मांगों पर गौर करेगी सरकार: राजन सीओएआई के डायरेक्टर जनरल राजन मैथ्यूज ने कहा कि हम इस सेक्टर के लिए कुछ राहत की उम्मीद कर रहे थे, लेकिन सरकार ने हमें निराश किया है। राजन ने कहा कि हमें अभी भी विश्वास है कि सरकार हमारी मांगों पर विचार करेगी। टेलीकॉम सेक्टर की प्रमुख मांगें 1-लाइसेंस फीस और स्पेक्ट्रम यूसेज चार्ज को तर्कसंगत बनाना। 2-सांविधिक लेवी में कटौती। 3-35 हजार करोड़ रुपए के जीएसटी इनपुट टैक्स क्रेडिट का भुगतान। Download Dainik Bhaskar App to read Latest Hindi News Today वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने रविवार को मेगा राहत पैकेज अंतिम किस्त की जानकारी दी जिसमें कुल 8 घोषणाएं की गईं https://bit.ly/3cIFTR6

मनरेगा में 40 हजार करोड़ का अतिरिक्त आवंटन, जिला और ब्लॉक स्तर पर बनाई जाएंगी पब्लिक हेल्थ लैब्स वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने रविवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस के जरिए 20 लाख करोड़ रुपए के राहत पैकेज की आखिरी किस्त की जानकारी दी। इसमें कुल 8 घोषणाएं की गईं। यह घोषणाएं मनरेगा, स्वास्थ्य, कारोबार, कंपनी एक्ट, ईज ऑफ डूइंग बिजनेस, पब्लिक सेक्टर एंटरप्राइजेज और राज्य सरकारों को लेकर थीं। दो बड़ी बातें यह कि स्ट्रैटजिक सेक्टर को छोड़कर बाकी पब्लिक सेक्टर अब प्राइवेट सेक्टर के लिए खोल दिए जाएंगे और अगर कोरोना की वजह से किसी कंपनी को नुकसान हुआ है तो उस पर एक साल तक दिवालिया की कार्रवाई नहीं होगी। आइए जानते हैं मनरेगा और हेल्थ सेक्टर पर सरकार की घोषणाएं और इनका किसको फायदा मिलेगा.. मनरेगा को 40 हजार करोड़ रुपए अतिरिक्त दिए जाएंगे क्या मिलेगा:सरकार मनरेगा पर 40 हजार करोड़ रुपए और खर्च करेगी। बजट में मनरेगा के लिए 61 हजार करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया था। इस प्रकार अब इसे बढ़ाकर 1.01 लाख करोड़ रुपए कर दिया गया है। किसे मिलेगा:ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले प्रवासी मजदूर जब अपने घर लौटेंगे तो उनके पास कमी नहीं रहेगी। इस फंड से 300 करोड़ व्यक्ति दिवस रोजगार सृजित होंगे। कैसे मिलेगा:मानसून के सीजन में भी मनरेगा के तहत काम दिया जाएगा। पानी सहेजने वाले कामों में मजदूरों को रोजगार मिलेगा। कब मिलेगा:सरकार तुरंत यह फंड रिलीज करेगी। इससे शहरों से गांव की ओर लौट रहे प्रवासी कामगारों को तुरंत रोजगार मिलेगा। हेल्थ सेक्टर: नए अस्पताल बनेंगे, ब्लॉक स्तर पर लैब्स बढ़ेंगी क्या मिलेगा:पब्लिक हेल्थ लैब्स न सिर्फ जिला स्तर पर, बल्कि ब्लॉक स्तर पर भी बनाई जाएंगी। किसे मिलेगा:गांवों, कस्बाई और शहरी इलाकों में संक्रामक बीमारियों का इलाज करने वाले अस्पताल बनेंगे। लोगों को नजदीकी अस्पतालों में सभी प्रकार का इलाज मिलेगा। कैसे मिलेगा:लैब और निगरानी का नेटवर्क मजबूत किया जाएगा। आईसीएमआर भी मदद करेगा। सरकार जमीनी स्तर पर काम करने वाली स्वास्थ्य संस्थाओं में निवेश बढ़ाएगी। नेशनल डिजिटल हेल्थ मिशन लॉन्च होगा। कब मिलेगा:यह साफ नहीं है। सरकार ने 56 दिनों में 20.97 लाख करोड़ रुपए के राहत पैकेज दिए, इनमें से 11 लाख करोड़ रुपए की घोषणाएं इन 5 दिनों में हुईं प्रधानमंत्री की घोषणा से पहले (22 मार्च से 12 मई तक) 1 लाख 92 हजार 800 करोड़ रुपए वित्त मंत्री की पहली प्रेस कॉन्फ्रेंस 5 लाख 94 हजार 550 करोड़ रुपए दूसरी प्रेस कॉन्फ्रेंस 3 लाख 10 हजार करोड़ रुपए तीसरी प्रेस कॉन्फ्रेंस 1 लाख 50 हजार करोड़ रुपए चौथी प्रेस कॉन्फ्रेंस 8100 करोड़ रुपए पांचवीं प्रेस कॉन्फ्रेंस 40 हजार करोड़ रुपए आरबीआई के कदम 8 लाख 1 हजार 603 करोड़ रुपए कुल 20 लाख 97 हजार 53 करोड़ रुपए Download Dainik Bhaskar App to read Latest Hindi News Today वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने रविवार को 20 लाख करोड़ रुपए के राहत पैकेज की आखिरी किस्त में मनरेगा समेत कुल 8 घोषणाएं कीं https://bit.ly/3cIFTR6

वित्त मंत्री ने दिया 20 लाख 97 हजार 053 करोड़ रुपए के आत्मनिर्भर भारत पैकेज का पूरा हिसाब वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने रविवार को 20 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा के आत्मनिर्भर भारत पैकेज का पूरा हिसाब दिया। इस पैकेज की घोषणा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को की थी। इस पैकेज के अंदर इस घोषणा से पहले जारी किए जा चुके पैकेज भी शामिल हैं। पीएम की घोषणा के बाद वित्त मंत्री ने बुधवार से रविवार तक हर दिन अलग-अलग सेक्टर के लिए पैकेज और सुधारों की घोषणा कर रही थीं। रविवार को इसका पांचवां और आखिरी चरण था। आत्मनिर्भर भारत पैकेज के तहत अब तक घोषित की गई राशि का पूरा हिसाब पैकेज का चरण घोषित राशि (करोड़ रुपए में) बुधवार, 13 मई 2020 को वित्त मंत्री द्वारा घोषित पैकेज 5,94,550 गुरुवार, 14 मई को वित्त मंत्री द्वारा घोषित पैकेज 3,10,000 शुक्रवार, 15 मई को वित्त मंत्री द्वारा घोषित पैकेज 1,50,000 शनिवार और रविवार, 16 और 17 मई को वित्त मंत्री द्वारा घोषित पैकेज 48,100 प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना सहित पुराने पैकेज 1,92,800 आरबीआई के कदम, जो अब तक लागू हो चुके हैं 8,01,403 कुल 20,97,053 बुधवार, 13 मई 2020 को वित्त मंत्री द्वारा घोषित 5,94,550 करोड़ रुपए के पैकेज का ब्योरा गुरुवार, 14 मई को वित्त मंत्री ने 3,10,000 करोड़ रुपए का पैकेज जारी किया था शुक्रवार, 15 मई को वित्त मंत्री ने 1,50,000 करोड़ रुपए का पैकेज जारी किया शनिवार, 16 मई और रविवार, 17 मई को वित्त मंत्री ने कुल 48,100 करोड़ रुपए का पैकेज जारी किया Download Dainik Bhaskar App to read Latest Hindi News Today Rahat Package ; Coronavirus ; COVID-19 ; Corona ; Finance Minister gave full account of 20 lakh 97 thousand 053 crore self-sufficient India package https://bit.ly/3cIFTR6

कॉर्पोरेट और एमएसएमई के लिए बैंकरप्सी प्रक्रिया में बदलाव, एक साल तक के लिए यह प्रक्रिया स्थगित, डिफॉल्ट की नई परिभाषा तय वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने 20 लाख करोड़ रुपए के आर्थिक पैकेज के पांचवें दिन ईजऑफ डूइंग बिजनेस को लेकर घोषणा की। कुल 7 विषयों पर उन्होंने सुधारों और राहत का फोकस तय किया। इसके तहत कोविड-19 की वजह से नए बैंकरप्सी यानी दिवालिया प्रक्रिया को एक साल तक के लिए स्थगित कर दिया गया है। साथ ही डिफॉल्ट की नई परिभाषा तय की गई है। किसे मिलेगा दिवालिया प्रक्रिया के तहत कॉर्पोरेट कंपनियों और एमएसएमई को राहत दी गई है। इस राहत का उद्देश्य यह है कि कोविड-19 से निपटने में इनको मदद मिल सके। क्या मिलेगा कॉर्पोरेट के लिए नए मामलों को एक साल तक के लिए स्थगित किया गया है। इसके साथ ही डिफॉल्ट की नई परिभाषा तय की गई है। इसी तरह एमएसएमई के लिए दिवालिया प्रक्रिया के तहत कम से कम राशि का आकार बढ़ाकर एक करोड़ रुपए कर दिया गया है। पहले यह एक लाख रुपए था। इससे यह फायदा मिलेगा कि ज्यादातर छोटी कंपनियां दिवालिया प्रक्रिया में आने से बच सकेंगी। कंपनीज एक्ट डिफॉल्ट में 7 कंपाउंडेबल अपराधों को पूरी तरह से समाप्त कर दिया गया और 5 अन्य को किसी वैकल्पिक फ्रेमवर्क के तहत निपटाया जाएगा। कब मिलेगा सेक्शन 240 ए के तहत एमएसएमई के लिए अलग से दिवालिया प्रक्रिया की जाएगी। इसके लिए जल्द नोटिफिकेशन जारी होगा। कैसे मिलेगा इंडियन बैंकरप्सी कोड (आईबीसी) में सुधार किया गया है। इसके तहत कंपनियों को डिफॉल्ट नहीं किया जाएगा। जिससे वे एक साल तक कोविड से प्रभावित होने पर अपने आप को मजबूत कर सकेंगी। अर्थव्यवस्था में सुस्ती का असर सब सेक्टर पर दिखा है कोविड-19 की वजह से अर्थव्यवस्था में सु्स्ती का असर सभी सेक्टर पर दिखा है। इस मंदी अर्थव्यवस्था से इन कंपनियों को निकालने के लिए बिजनेस करने में आसानी हो, इसलिए यह बदलाव किया गया है। वित्तमंत्री ने कहा कि कंपनी एक्ट में संशोधन जारी है और कई धाराओं को आपराधिक श्रेणी से बाहर किया जाएगा। अब तकनीकी गलती के कारण कोई आपराधिक कार्रवाई नहीं की जाएगी और इससे डिफॉल्ट नियम को बदलकर कंपनियों को राहत भी प्रदान की जाएगी। इसका फायदा यह होगा कि एनसीएलटी में जाने वाले मामलों की संख्या भी काफी कम हो जाएगी। Download Dainik Bhaskar App to read Latest Hindi News Today सुधार का फायदा यह होगा कि एनसीएलटी में जाने वाले मामलों की संख्या भी काफी कम हो जाएगी। https://bit.ly/3cIFTR6

आत्मनिर्भर भारत के लिए सरकार लाएगी नई पब्लिक सेक्टर एंटरप्राइजेज नीति, एक सेक्टर में केवल 1-4 सरकारी कंपनी होंगी कोरोना आपदा से निपटने के लिए घोषित किए गए 20 लाख करोड़ रुपए के प्रोत्साहन पैकेज की अंतिम और पांचवीं किस्त की रविवार को घोषणा की गई। इस दौरान वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि पूरी दुनिया अब रिफॉर्म पर जोर दे रही है। इसी दिशा में हमने भी अब पब्लिक सेक्टर एंटरप्राइजेज (पीएसई) में बदलाव का फैसला किया है। इसके लिए जल्द नई पब्लिक सेक्टर एंटरप्राइजेज नीति लाई जाएगी। वित्त मंत्री की घोषणा आत्मनिर्भर भारत के लिए पब्लिक सेक्टर एंटरप्राइजेज के लिए नई नीति लाई जाएगी। सार्वजनिक हित के लिए पब्लिक सेक्टर एंटरप्राइजेज के लिए रणनीतिक सेक्टर की एक नई लिस्ट जारी की जाएगी। एक सेक्टर में पब्लिक सेक्टर की कम से कम एक और अधिकतम चार कंपनियां शामिल होंगी। इसके अतिरिक्त प्रत्येक सेक्टर में प्राइवेट कंपनियां भी शामिल हो सकेंगी। रणनीतिक लिस्ट से अलग सेक्टर की कंपनियों का निजीकरण या विलय किया जाएगा। क्या फायदा होगा एक सेक्टर में सरकारी कंपनियों की संख्या कम होने से प्रतियोगिता खत्म होगी। इससे कंपनी को व्यापार करने में आसानी होगी। कंपनियों का सेक्टर के हिसाब से वर्गीकरण करने से सरकार को प्रशासनिक और आर्थिक दोनों तौर पर फायदा होगा। सरकारी कंपनियों पर किए जाने वाले खर्च पर अंकुश लगेगा। सरकार को मिलेगा फंड रणनीतिक सेक्टर के हिसाब से कंपनियों का निर्धारण करने के बाद अन्य कंपनियों का निजीकरण या दूसरी कंपनियों के साथ विलय किया जाएगा। इससे सरकार को अतिरिक्त फंड मिलेगा। निजी सेक्टर को भी होगा फायदा सरकार की इस नीति से निजी सेक्टर की कंपनियों को भी फायदा होगा। वे भी सरकार की ओर से तय किए जाने वाले रणनीतिक सेक्टर में सरकारी कंपनियों के साथ कारोबार कर सकेंगी। अभी कई सेक्टर्स में प्राइवेट कंपनियों को कारोबार की इजाजत नहीं है। कंपनी मैनेजमेंट में भी लाभ मिलेगा एक सेक्टर में निर्धारित पीएसई रहने से सरकार को कंपनी मैनेजमेंट में फायदा होगा। इसके लिए सरकार को ज्यादा अधिकारी नियुक्त नहीं करने होंगे। इससे प्रशासनिक खर्च कम होगा। Download Dainik Bhaskar App to read Latest Hindi News Today वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने रविवार को 20 लाख करोड़ रुपए के राहत पैकेज की अंतिम किस्त की घोषणा की। इसमें कई सेक्टर्स में रिफॉर्म का ऐला किया गया https://bit.ly/3cIFTR6

एयरटेल ने लॉन्च किया 365 दिन की वैलिडिटी वाला नया प्लान, अनलिमिटेड कॉलिंग के साथ रोजाना मिलेगा 2GB डाटा नई दिल्ली। टेलीकॉम कंपनी एयरटेल ने एक नया प्रीपेड प्लान लॉन्च किया है। इस एक साल की वैलिडिटी वाले प्लान कीकीमत 2,498 रुपए रखी गई है। इससे पहले 365 दिनों के लिए एयरटेल के और 2 प्लान भी हैं, जिसकी कीमत 1,498 और 2,398 रुपए हैं। ऐसे में अब कंपनी के पास 365 दिन वाले 3 प्रीपेड प्लान हो गए हैं। इन सभी प्लान्स में एक्सट्रीम ऐप प्रीमियम और विंक म्यूजिक कीमेंबरशिप भी मिलती है। 2,498 रुपए वाला प्लान 365 दिन की वैलिडिटी वाले इस प्लान में सभी नेटवर्क पर अनलिमिटेड कॉलिंग के साथ हर रोज 2जीबी डाटा मिलता है। इस तरह ग्राहकों को कुल 730जीबी डाटा मिल जाता है। इसके अलावा ग्राहकों को हर रोज 100 एसएमएस भी मिलते हैं। इसमें जी प्राइम का सब्सक्रिप्शन फ्री मिल रहा है।2,398 रुपए का प्लान इस प्लान में 365 दिन के लिए अनलिमिटेड कॉलिंग के साथ हर रोज 1.5जीबी डाटा रोजाना मिलता है। इसके अलावा ग्राहकों को हर रोज 100 एसएमएस भी मिलते हैं। इसमें जी प्राइम का सब्सक्रिप्शन फ्री मिल रहा है। इसमें जी प्राइम का सब्सक्रिप्शन फ्री मिल रहा है। 1,498 रुपए का प्लान 365 दिन की वैलिडिटी वाले इस प्लान में सभी नेटवर्क पर अनलिमिटेड कॉलिंग के साथ 24जीबी डाटटा (सालभर के लिए) मिलता है। इसके अलावा ग्राहकों को हर रोज 100 एसएमएस भी मिलते हैं। इसमें जी प्राइम का सब्सक्रिप्शन फ्री मिल रहा है। Download Dainik Bhaskar App to read Latest Hindi News Today 365 दिन की वैलिडिटी वाले इस प्लान में सभी नेटवर्क पर अनलिमिटेड कॉलिंग के साथ हर रोज 2जीबी डाटा मिल रहा है https://bit.ly/3cIFTR6

राइट्स इश्यू के जरिए 300 करोड़ रुपए जुटाएगा किशोर बियानी का फ्यूचर कंज्यूमर, बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स ने दी मंजूरी किशोर बियानी के नेतृत्व वाले फ्यूचर ग्रुप की कंपनी फ्यूचर कंज्यूमर फंड का इंतजाम करने के लिए राइट्स इश्यू लाने की योजना बना रही है। बीएसई फाइलिंग के अनुसार, फ्यूचर कंज्यूमर राइट्स इश्यू के जरिए 300 करोड़ रुपए जुटाएगी। इस राइट्स इश्यू को कंपनी के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स ने 16 मई को मंजूरी दे दी है। नियम-शर्तें तय करने के लिए डायरेक्टर्स की कमेटी बनेगी बीएससई फाइलिंग के मुताबिक इस राइट्स इश्यू के नियम और शर्तें तय करने के लिए डायरेक्टर्स की एक कमेटी बनाई जाएगी। यह कमेट राइट्स एंटाइटलमेंट अनुपात, इश्यू प्राइस, रिकॉर्ड डेट, भुगतान विकल्प, राइट्स इश्यू का समय और इससे संबंधित अन्य मुद्दे को तय करेगी। बीएसई फाइलिंग के मुताबिक इस राइट्स इश्यू में 6 रुपए की फेस वैल्यू पर इक्विटी शेयर जारी किए जाएंगे। हाल ही में इंश्योरेंस कारोबार बेचने का ऐलान किया था देश की बड़ी रिटेल कंपनियों में शुमार फ्यूचर ग्रुप ने हाल ही में अपने इंश्योरेंस कारोबार फ्यूचर जेनराली इंडिया इंश्योरेंस को बेचने की घोषणा की थी। इस कंपनी में फ्यूचर ग्रुप की करीब 50 फीसदी हिस्सेदारी है। कर्ज मुक्ति के लिए नॉन-कोर एसेट्स की बिक्री कर रहा फ्यूचर ग्रुप फ्यूचर ग्रुप पर करीब 10 हजार करोड़ रुपए का कर्ज है। इस ग्रुप में किशोर बियानी की करीब 90 फीसदी हिस्सेदारी है। कर्ज चुकाने के लिए फ्यूचर ग्रुप अपने नॉन-कोर एसेट्स की बिक्री कर रहा है। इसके अलावा किशोर बियानी अमेजन और प्रेमजी इवेस्ट जैसे निवेशकों से भी फंडिंग को लेकर बातचीत कर रहे हैं। फ्यूचर कंज्यूमर की ओर से दी गई जानकारी Download Dainik Bhaskar App to read Latest Hindi News Today किशोर बियानी कर्ज चुकाने के लिए फ्यूचर ग्रुप के नॉन-कोर एसेट्स की बिक्री कर रहे हैं। अमेजन और प्रेमजी इवेस्ट जैसे निवेशकों से भी फंडिंग को लेकर बातचीत चल रही है https://bit.ly/3cIFTR6

कोरोना संकट में बेहतर कल के लिए आज से ही संभालनी होगी वित्तीय स्थिति, ताकि भविष्य में होने वाले नुकसान से निपटा जा सके कोविड-19 हमारी सेहत के साथ-साथ वित्तीय स्थिति को भी प्रभावित कर रहा है। इस दौर में हमारे पैसे ख़र्च करने का तरीक़ा बदला है और क्षमता भी। आने वाले कल पर भी इसका कितना असर होगा कितना नहीं, ये हम नहीं जानते पर तैयारी पहले से रखनी होगी। बेहतर कल के लिए आज से ही वित्तीय स्थिति संभालनी होगी ताकि भविष्य में होने वाले नुक़सान और पैसों की तंगी से निपटा जा सके। ऐसा कर पाना मुश्किल नहीं है। इसके लिए समझदारी से पैसों का प्रबंधन, बेहतर वित्तीय नियोजन और अनुशासन की आवश्यकता है। डॉ.संजय मित्तल ,सीनियर बैंकर एंड मनी मैनेजर बता रहे हैं कि ऐसे में आपको क्या करना चाहिए। मौजूदा स्थिति का आकलन भविष्य के लिए वित्तीय योजना बनाने के पहले मौजूदा स्थिति का आकलन करें। आप कितना कमाते हैं और अपनी कमाई कहां- कहां खर्च करते हैं, इसका विश्लेषण करें। ऋण का भुगतान करने में कोई दिक़्क़त तो नहीं है। इसके बाद आपात स्थितियों के लिए पर्याप्त राशि है या नहीं, यह सुनिश्चित करें। मौजूदा बीमा योजनाओं का विश्लेषण करें और देखें कि किसी अप्रिय परिस्थिति के लिए आपके पास पर्याप्त बीमा राशि है या नहीं। इन सबसे आपको अपनी वित्तीय स्थिति का पता चलेगा। अगर कोई वित्तीय समस्या है, तो किन क्षेत्रों में ध्यान देने की आवश्यकता है ये इस विश्लेषण से पता चलेगा। भविष्य के लिए निवेश भविष्य में ज़्यादा वित्तीय परेशानी और चिंता ना बढ़े, इसके लिए निवेश के सही विकल्प चुनें। म्यूचुअल फंड में एसआईपी के ज़रिए निवेश कर सकते हैं। छोटी बचत योजनाएं जैसे पीपीएफ, पोस्ट ऑफिस बचत योजना आदि में वित्तीय ज़रूरतों के हिसाब से निवेश कर सकते हैं। ये योजनाएं शादी, शिक्षा, स्वास्थ्य देखभाल आदि के लिए पैसों की ज़रूरत को पूरा करती हैं। साथ ही टैक्स की बचत भी होती है। भविष्य में इन निवेशों का लाभ उठा सकते हैं। कम करने होंगे ख़र्चे सबसे पहले अपने ख़र्चों को नियंत्रित करें। अगर पिछले पचास दिनों का विश्लेषण करें, तो आपके ख़र्च स्वयं नियंत्रित हो गए हैं। आप आराम से अपनी ज़िंदगी गुज़ार रहे हैं। ना कहीं आने-जाने में ख़र्च हुआ है और ना बाहर खाने पर। इनके अलावा फ़िज़ूल की ख़रीदारी और ख़र्च भी बंद हैं। इनको इसी तरह आगे भी नियंत्रित रखना है। एक-दो साल तक यात्राएं ना करने और यथासम्भव बाहर भोजन ना करने की हिदायत दी गई है, इसके साथ ही कपड़ों, सजावटी वस्तुओं, नए उपकरणों को आज़माने की इच्छा पूर्ति आदि के लिए भी हाथ बांधकर चलना होगा। इन्हें जीवन का नियम बना लें और इनसे बचने वाले पैसों को सही जगह निवेश करें, ताकि भविष्य में इनका सही उपयोग किया जा सके। नए कर्ज़ लेने से बचें इस दौर में जितने क़र्ज़ लेंगे, भविष्य में उतनी ही क़िस्तंे चुकानी होंगी। ऐसे में भविष्य में बचत के बजाय ख़र्च बढ़ेंगे। इसके अलावा छोटी-बड़ी ज़रूरतों, जैसे मोबाइल फोन, कैमरा, लैपटॉप, ऑनलाइन शॉपिंग के लिए ईएमआई से भुगतान करने से बचें। अगर आप ईएमआई पर सामान ख़रीदते हैं, तो उस सामान की एमआरपी से ज़्यादा क़ीमत चुका रहे होते हैं। चाहे सामान्य ईएमआई पर सामान ख़रीदें या नो कॉस्ट ईएमआई पर, हर स्थिति में एमआरपी से ज़्यादा क़ीमत देनी पड़ती है। ख़रीदारी के दौरान इस तरह की छोटी-छोटी समझदारियां लाभ देंगी। आदतों को बदलें आमदनी के नए रास्ते खोजें: भविष्य में खर्चों को पूरा करने के लिए अपनी हॉबी को कमाई का जरिया बनाएं। अगर वित्तीय ज्ञान है तो सलाहकार बने या कोई कला है तो उसका उपयोग भी कर सकते हैं। इससे अपना शौकभी पूरा होगा और कमाई भी हो जाएगी। क्रेडिट कार्ड का सही इस्तेमाल: अगर आपके पास क्रेडिट कार्ड है तो ऐसे समय में उसका कम से कम और सही इस्तेमाल करें। जिन क्रेडिट कार्ड की जरुरत नहीं उनको हटा दें। इससे गैरजरूरी चीजे न खरीदें। खुद संभाले काम: इस दौर में हमने अपने घर का काम खुद करने की आदत डालनी चाहिए। जिन कामों का अभी तक आप मोल चुकाते थे, उन्हें अगर खुद कर सकते हैं तो करें और पैसे बचाएं। हर बचाया हुआ पैसा बचत ही है। Download Dainik Bhaskar App to read Latest Hindi News Today इस दौर में जितने क़र्ज़ लेंगे, भविष्य में उतनी ही क़िस्तंे चुकानी होंगी। ऐसे में भविष्य में बचत के बजाय ख़र्च बढ़ेंगे। https://bit.ly/3cIFTR6