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सुबह 4.30 बजे फ्लाइट पकड़ने पहुंचे तो एयरपोर्ट जाकर मालूम हुआ सुबह 7 बजे की फ्लाइट शाम 6 बजे के लिए रीशेड्यूल कर दी है दिल्ली के अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्‌डे से, लॉकडाउन के बीच आज पूरे 62 दिनों के बाद डोमेस्टिक फ्लाइट शुरू हुईं। हम सवेरे साढ़े चार बजे राजधानी दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डे पहुंचे। सवेरे 7 बजे की उड़ान के लिए कम से कम दो घंटे पहले एयरपोर्ट पहुंचना जरूरी था। हम दो लोग थे और दो अलग-अलग रूट्स के टिकट लिए थे। एक रूट था, दिल्ली से मुंबई जिसके बाद दोपहर में कनेक्टिंग फ्लाइट लेकर मुंबई से जयपुर जाना था और अगली सुबह फिर जयपुर से दिल्ली। वहीं दूसरे रूट पर दिल्ली से हैदराबाद और फिर शाम को कनेक्टिंग फ्लाइट लेकर हैदराबाद से इंदौर और अगले दिन इंदौर से दिल्ली पहुंचना था। एयरपोर्ट पहुंचे तो सब सामान्य था, हां हमारी हैदराबाद से इंदौर की फ्लाइट कैंसिल होने का मैसेज जरूरत रात 1 बजे मिला था। सबकुछ प्लान के मुताबिक चल रहा था लेकिन फिर दिल्ली से हमारी दोनों फ्लाइट्स रीशेड्यूल कर दी गईं। सुबह 7 बजे जिस फ्लाइट को निकलना था वह शाम 6 बजे जाएगी, ऐसा कहा गया। कारण पूछा तो बोले, लोड कम है। या तो टिकट ही बुक नहीं हुए या फिर लोग एयरपोर्ट तक नहीं पहुंचे। सुबह जब हमने कैब लेने की कोशिश की तो वो भी नहीं मिली। बमुश्किल एयरपोर्ट पहुंचे। एयरपोर्ट पर शुरुआती माहौल सहज और सामान्य दिखा, पीपीई, ग्लव्स, मास्क से मुस्तैद यात्री बाकायदा सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए बारी-बारी से एयरपोर्ट में प्रवेश करने के लिए लाइनों में लगे थे। लग रहा था जैसे पूरे माहौल पर कोरोना से जुड़ी ऐहतियात हावी हैं। सुबह-सुबह एयरपोर्ट पर जिस दुकान पर सबसे ज्यादा खरीदार दिखे वह मास्क, शील्ड और पीपीई किट बेचने वाला काउंटर था। जो यात्री एयरपोर्ट पर थे उनमें ज्यादातर स्टूडेंट्स, बुजुर्ग और छोटे बच्चे थे। दूसरे यात्रियों से बातचीत के बाद यह मालूम होने लगा कि महाराष्ट्र, झारखंड, पश्चिम बंगाल समेत गुजरात की उड़ानें आज रवाना नहीं हो रही हैं। इन्हीं सबसे से जूझते यात्री अपनी फ्लाइटों की रीशेड्यूलिंग के लिए पूछताछ काउंटरों पर जमा होने लगे। यात्री हताश और निराश हैं, दूर-दूर से सवेरे की शुरुआती उड़ानों के लिए तैयारी कर पहुंचे पैसेंजरों की मदद के नाम पर एयरलाइंस बस इतना कर रही हैं कि उन्हें डिले सर्टिफिकेट पकड़ा रही है जिनके आधार पर वे अपना पैसा वापस ले सकते हैं। लोग अपना सा मुंह लेकर लौटने लगे हैं, एयरपोर्ट परिसर में ही ऊंघते, ऊबते और हलकान-परेशान पैसेंजरों को देखा जा सकता है। आज की ताज़ा ख़बरें पढ़ने के लिए दैनिक भास्कर ऍप डाउनलोड करें सोमवार अल सुबह दिल्ली एयरपोर्ट पर अपनी फ्लाइट का शेड्यूल देखते लोग। 62 दिन बाद उड़ानें शुरू होने के बावजूद भी एयरपोर्ट पर भीड़ नहीं दिखी। May 25, 2020 at 07:32AM https://bit.ly/3cIFTR6

अजमेर में डॉक्टरों ने निभाया माता- पिता का फर्ज, उज्जैन में कोरोना से जंग में जीतने के लिए महाकाल की शरण में पहुंचा पुलिस अफसर देशभर में लॉकडाउन जारीहै। इस दौरान मानवीय संवेदनाओं को चित्रित करती हुई कई तस्वीरें कईराज्यों से सामने आई हैं। ऐसे ही ऊपर नजर आ रही तस्वीर उज्जैन स्थित महाकाल मंदिर की है।यहां एसपी मनोज सिंह रविवार को भगवान महाकाल की शरण में पहुंचे। उन्होंने भगवान महाकालेश्वर से कोरोना से शहर और देश को मुक्त करने की प्रार्थना की। डॉक्टरों ने निभाया मां-बाप का फर्ज यज्ञनारायण अस्पताल में मजदूर दंपति के जब कम वजन की बच्ची पैदा हुई तो उन्होंने यह सोच लिया कि वह इस दुनिया में नहीं बच पाएगी। मजबूरी यहकि अगर वे इसे ले जाएं तो आखिर कहां पर और अगर अस्पताल में ही रहने दे तो उनके साथ तीन और बच्चों को भी अस्पताल में रखना पड़ता,जो कोरोना के दौरान संभव नहीं था। ऐसे में उसने डॉक्टरों को ही अपना भगवान मानते हुए स्टाफ के भरोसे ही बच्ची को छोड़ दिया। अबस्टाफही देखभाल कर रहा है। एक तरफ जिदंगी, एक तरफ मौत कोरोना और लॉकडाउन के कारण मजदूर जितने बेबस दिखाई दिए, वैसा शायद कोई नहीं। तेलंगाना से वापस लौट रही एक महिला ने चलती ट्रेन में एक बच्ची को जन्म दिया। हाल ही में ट्रेन में पैदा होने बच्चों की कई खबरें आई हैं। तेलंगाना के काजुपेटा में परिवार काम करता था। कामधाम छूट गया। डिलीवरी तक वहां रुकने का कोई इंतजाम नहीं बचा। सोचा, गांव जाकर इलाज करवा लेंगे, एक दिन की ही तो बात है। पर करीब 45 डिग्री के तापमान में ट्रेन के भीतर अचानक दर्द उठा और एक लड़की हुई। महिला इस दर्द को कुछ घंटे सहती रही, तब तक टिटिलागढ़ खबर पहुंच चुकी थी, लिहाजा एंबुलेंस और डॉक्टर्स आ चुके थे। दोनों की जांच हुई। अस्पताल ले जाकर दोनों को क्वारेंटाइन किया। पिता मंगल विश्वकर्मा ने सोचा भी नहीं था कि उसकी चौथी संतान ऐसे ट्रेन में होगी। वहीं दूसरीतस्वीर रविवार सुबह 7:45 बजे मुजफ्फरपुर जंक्शन की। आइस बाॅक्स के सामने पूरे समय मां रोती रही। बोली-सालों मन्नत के बाद जो बेटी जन्मी, उसका सफर मेरी कोख से इस आइसबाक्स तक ही रहा। आखिरी सांस तक निभाएंगे सात फेरों का वचन हरदोई के मनसा राम और अंजली की शादी लॉकडाउन से पहले हुई थी। ये दंपति 19 मार्च को पंचकूला स्थित मनसा देवी मंदिर में माथा टेकने आए थे। लॉकडाउन के कारण वे 2 महीने से चंडीगढ़ में फंसे हुए थे। जब वे यहां आए तो कुछ दिन बाद ही कर्फ्यू लग गया और यहीं फंसे रह गए। मनसा राम और उनकी पत्नी दोनों ही दिव्यांग हैं। पैसे न होने से मुश्किल से खाने का इंतजाम हो पाता था। उनके गांव का एक शख्स बुड़ैल गांव में रहता है, उसने इन दोनों को अपने घर में जगह दी। रविवार को चंडीगढ़ से चली स्पेशल ट्रेन से दोनों को वापस भेजा गया। यह युद्ध है और इस बार यूनिफॉर्म का रंग नीला पुलिस ने रविवार को मुकेरीपुरा समेत शहर के अन्य कंटेनमेंट क्षेत्रों में फ्लैग मार्च निकाला। इस दौरान पुलिस के जवान पीपीई किट पहन कर अपनी ड्यूटी करते हुए नजर आए। यह लट‌्ठमार होली नहीं, कोरोना काल की शादी है दनियावां स्थित सूर्य मंदिर में सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए रविवार की देर शाम दूल्हा- दुल्हन शादी के पवित्र बंधन में बंधे। एक-दूसरे को लकड़ी से वरमाला पहनाई। पेड़ के सहारे गांव की हिफाजत दुर्गूकोंदल जिले में लगातार गुरुवार और शुक्रवार को 5 कोरोना संक्रमण के मरीज मिले हैं। संक्रमित मरीज के मिलते ही पूरा दुर्गकोंदल क्षेत्र अचानक सतर्क हो गया है। जिले में कोरोना मरीज मिलने के बाद ग्रामीण भी अपने स्तर पर सतर्कता बरतने में लगे हैं। गांवों के प्रवेश मार्ग को पेड़ की टहनियों और झाड़ियों से बंद कर दिया है। वहीं आने-जाने वालों के नाम में अन्य जानकारी ली जा रही है। .....अकेले ब्याह कर लाया दुल्हनिया कोरोना संक्रमण के चलते कर्फ्यू खत्म हो चुका है। अब शादियां भी हो रही हैं। 50 लोग शामिल भी हो सकते हैं। इसके बावजूद भादसों रोड निवासी युवराज गांव कल्याण के गुरुद्वारा में हुए अपने आनंद कारज में अकेले पहुंचे। सोशल डिस्टेंसिंग रखी। अपनी दुल्हनिया चमनप्रीत के लिए सेनेटाइजर और मास्क भी ले गए। बुलेट पर लौटते समय नाके पर पुलिस ने उनका स्वागत भी किया। तेज धूप पर भारीप्याल की छांव रविवार को हजारों श्रमिक गांव जाने के लिए तेज धूप में घंटों खड़े रहे। स्टेशन तक जाने के लिए ये श्रमिक बसों का इंतजार कर रहे थे। रविवार को अधिकतम तापमान 40.6 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया। दिन पर चली गर्म हवाओं के कारण लोगों को तपन भरी गर्मी से जूझना पड़ा। मौसम विभाग के अनुसार रविवार को अधिकतम तापमान 40.6 डिग्री और न्यूनतम तापमान 27.6 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। वातावरण में नमी सुबह 57 और शाम को 58 प्रतिशत रही। हवा उत्तर-पश्चिम दिशा से 9 किमी प्रति घंटा की गति से चली। दो दिन हीट वेव रहेगी और तापमान 40 से 42 डिग्री के बीच रहने का अनुमान है। रील लाइफ में विलेन, रीयल लाइफ में हीरो सोनू सूद ने बताया कि ‘15 मई के आसपास की बात है। मैं प्रवासियाें को ठाणे में फल और खाने के पैकेट बांट रहा था। उन्होंने बताया कि वे लोग पैदल ही कर्नाटक और बिहार जा रहे हैं। यह सुनकर मेरे होश उड़ गए कि बच्चों, बूढ़ों के साथ ये लोग पैदल कैसे जाएंगे। मैंने उनसे कहा कि आप दो दिन रुक जाएं। मैं भिजवाने का प्रबंध करता हूं। नहीं कर सका तो बेशक चले जाना।’ आज की ताज़ा ख़बरें पढ़ने के लिए दैनिक भास्कर ऍप डाउनलोड करें Doctors performed the duty of parents in Ajmer, SP Manoj Singh arrived in Mahakal's asylum to win the battle from Corona in Ujjain. May 25, 2020 at 07:34AM https://bit.ly/3cIFTR6

अजमेर में डॉक्टरों ने निभाया माता- पिता का फर्ज, उज्जैन में कोरोना से जंग में जीतने के लिए महाकाल की शरण में पहुंचा पुलिस अफसर देशभर में लॉकडाउन जारीहै। इस दौरान मानवीय संवेदनाओं को चित्रित करती हुई कई तस्वीरें कईराज्यों से सामने आई हैं। ऐसे ही ऊपर नजर आ रही तस्वीर उज्जैन स्थित महाकाल मंदिर की है।यहां एसपी मनोज सिंह रविवार को भगवान महाकाल की शरण में पहुंचे। उन्होंने भगवान महाकालेश्वर से कोरोना से शहर और देश को मुक्त करने की प्रार्थना की। डॉक्टरों ने निभाया मां-बाप का फर्ज यज्ञनारायण अस्पताल में मजदूर दंपति के जब कम वजन की बच्ची पैदा हुई तो उन्होंने यह सोच लिया कि वह इस दुनिया में नहीं बच पाएगी। मजबूरी यहकि अगर वे इसे ले जाएं तो आखिर कहां पर और अगर अस्पताल में ही रहने दे तो उनके साथ तीन और बच्चों को भी अस्पताल में रखना पड़ता,जो कोरोना के दौरान संभव नहीं था। ऐसे में उसने डॉक्टरों को ही अपना भगवान मानते हुए स्टाफ के भरोसे ही बच्ची को छोड़ दिया। अबस्टाफही देखभाल कर रहा है। एक तरफ जिदंगी, एक तरफ मौत कोरोना और लॉकडाउन के कारण मजदूर जितने बेबस दिखाई दिए, वैसा शायद कोई नहीं। तेलंगाना से वापस लौट रही एक महिला ने चलती ट्रेन में एक बच्ची को जन्म दिया। हाल ही में ट्रेन में पैदा होने बच्चों की कई खबरें आई हैं। तेलंगाना के काजुपेटा में परिवार काम करता था। कामधाम छूट गया। डिलीवरी तक वहां रुकने का कोई इंतजाम नहीं बचा। सोचा, गांव जाकर इलाज करवा लेंगे, एक दिन की ही तो बात है। पर करीब 45 डिग्री के तापमान में ट्रेन के भीतर अचानक दर्द उठा और एक लड़की हुई। महिला इस दर्द को कुछ घंटे सहती रही, तब तक टिटिलागढ़ खबर पहुंच चुकी थी, लिहाजा एंबुलेंस और डॉक्टर्स आ चुके थे। दोनों की जांच हुई। अस्पताल ले जाकर दोनों को क्वारेंटाइन किया। पिता मंगल विश्वकर्मा ने सोचा भी नहीं था कि उसकी चौथी संतान ऐसे ट्रेन में होगी। वहीं दूसरीतस्वीर रविवार सुबह 7:45 बजे मुजफ्फरपुर जंक्शन की। आइस बाॅक्स के सामने पूरे समय मां रोती रही। बोली-सालों मन्नत के बाद जो बेटी जन्मी, उसका सफर मेरी कोख से इस आइसबाक्स तक ही रहा। आखिरी सांस तक निभाएंगे सात फेरों का वचन हरदोई के मनसा राम और अंजली की शादी लॉकडाउन से पहले हुई थी। ये दंपति 19 मार्च को पंचकूला स्थित मनसा देवी मंदिर में माथा टेकने आए थे। लॉकडाउन के कारण वे 2 महीने से चंडीगढ़ में फंसे हुए थे। जब वे यहां आए तो कुछ दिन बाद ही कर्फ्यू लग गया और यहीं फंसे रह गए। मनसा राम और उनकी पत्नी दोनों ही दिव्यांग हैं। पैसे न होने से मुश्किल से खाने का इंतजाम हो पाता था। उनके गांव का एक शख्स बुड़ैल गांव में रहता है, उसने इन दोनों को अपने घर में जगह दी। रविवार को चंडीगढ़ से चली स्पेशल ट्रेन से दोनों को वापस भेजा गया। यह युद्ध है और इस बार यूनिफॉर्म का रंग नीला पुलिस ने रविवार को मुकेरीपुरा समेत शहर के अन्य कंटेनमेंट क्षेत्रों में फ्लैग मार्च निकाला। इस दौरान पुलिस के जवान पीपीई किट पहन कर अपनी ड्यूटी करते हुए नजर आए। यह लट‌्ठमार होली नहीं, कोरोना काल की शादी है दनियावां स्थित सूर्य मंदिर में सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए रविवार की देर शाम दूल्हा- दुल्हन शादी के पवित्र बंधन में बंधे। एक-दूसरे को लकड़ी से वरमाला पहनाई। पेड़ के सहारे गांव की हिफाजत दुर्गूकोंदल जिले में लगातार गुरुवार और शुक्रवार को 5 कोरोना संक्रमण के मरीज मिले हैं। संक्रमित मरीज के मिलते ही पूरा दुर्गकोंदल क्षेत्र अचानक सतर्क हो गया है। जिले में कोरोना मरीज मिलने के बाद ग्रामीण भी अपने स्तर पर सतर्कता बरतने में लगे हैं। गांवों के प्रवेश मार्ग को पेड़ की टहनियों और झाड़ियों से बंद कर दिया है। वहीं आने-जाने वालों के नाम में अन्य जानकारी ली जा रही है। .....अकेले ब्याह कर लाया दुल्हनिया कोरोना संक्रमण के चलते कर्फ्यू खत्म हो चुका है। अब शादियां भी हो रही हैं। 50 लोग शामिल भी हो सकते हैं। इसके बावजूद भादसों रोड निवासी युवराज गांव कल्याण के गुरुद्वारा में हुए अपने आनंद कारज में अकेले पहुंचे। सोशल डिस्टेंसिंग रखी। अपनी दुल्हनिया चमनप्रीत के लिए सेनेटाइजर और मास्क भी ले गए। बुलेट पर लौटते समय नाके पर पुलिस ने उनका स्वागत भी किया। तेज धूप पर भारीप्याल की छांव रविवार को हजारों श्रमिक गांव जाने के लिए तेज धूप में घंटों खड़े रहे। स्टेशन तक जाने के लिए ये श्रमिक बसों का इंतजार कर रहे थे। रविवार को अधिकतम तापमान 40.6 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया। दिन पर चली गर्म हवाओं के कारण लोगों को तपन भरी गर्मी से जूझना पड़ा। मौसम विभाग के अनुसार रविवार को अधिकतम तापमान 40.6 डिग्री और न्यूनतम तापमान 27.6 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। वातावरण में नमी सुबह 57 और शाम को 58 प्रतिशत रही। हवा उत्तर-पश्चिम दिशा से 9 किमी प्रति घंटा की गति से चली। दो दिन हीट वेव रहेगी और तापमान 40 से 42 डिग्री के बीच रहने का अनुमान है। रील लाइफ में विलेन, रीयल लाइफ में हीरो सोनू सूद ने बताया कि ‘15 मई के आसपास की बात है। मैं प्रवासियाें को ठाणे में फल और खाने के पैकेट बांट रहा था। उन्होंने बताया कि वे लोग पैदल ही कर्नाटक और बिहार जा रहे हैं। यह सुनकर मेरे होश उड़ गए कि बच्चों, बूढ़ों के साथ ये लोग पैदल कैसे जाएंगे। मैंने उनसे कहा कि आप दो दिन रुक जाएं। मैं भिजवाने का प्रबंध करता हूं। नहीं कर सका तो बेशक चले जाना।’ आज की ताज़ा ख़बरें पढ़ने के लिए दैनिक भास्कर ऍप डाउनलोड करें Doctors performed the duty of parents in Ajmer, SP Manoj Singh arrived in Mahakal's asylum to win the battle from Corona in Ujjain. May 25, 2020 at 07:34AM https://bit.ly/3cIFTR6

सुबह 4.30 बजे फ्लाइट पकड़ने पहुंचे तो एयरपोर्ट जाकर मालूम हुआ सुबह 7 बजे की फ्लाइट शाम 6 बजे के लिए रीशेड्यूल कर दी है दिल्ली के अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्‌डे से, लॉकडाउन के बीच आज पूरे 62 दिनों के बाद डोमेस्टिक फ्लाइट शुरू हुईं। हम सवेरे साढ़े चार बजे राजधानी दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डे पहुंचे। सवेरे 7 बजे की उड़ान के लिए कम से कम दो घंटे पहले एयरपोर्ट पहुंचना जरूरी था। हम दो लोग थे और दो अलग-अलग रूट्स के टिकट लिए थे। एक रूट था, दिल्ली से मुंबई जिसके बाद दोपहर में कनेक्टिंग फ्लाइट लेकर मुंबई से जयपुर जाना था और अगली सुबह फिर जयपुर से दिल्ली। वहीं दूसरे रूट पर दिल्ली से हैदराबाद और फिर शाम को कनेक्टिंग फ्लाइट लेकर हैदराबाद से इंदौर और अगले दिन इंदौर से दिल्ली पहुंचना था। एयरपोर्ट पहुंचे तो सब सामान्य था, हां हमारी हैदराबाद से इंदौर की फ्लाइट कैंसिल होने का मैसेज जरूरत रात 1 बजे मिला था। सबकुछ प्लान के मुताबिक चल रहा था लेकिन फिर दिल्ली से हमारी दोनों फ्लाइट्स रीशेड्यूल कर दी गईं। सुबह 7 बजे जिस फ्लाइट को निकलना था वह शाम 6 बजे जाएगी, ऐसा कहा गया। कारण पूछा तो बोले, लोड कम है। या तो टिकट ही बुक नहीं हुए या फिर लोग एयरपोर्ट तक नहीं पहुंचे। सुबह जब हमने कैब लेने की कोशिश की तो वो भी नहीं मिली। बमुश्किल एयरपोर्ट पहुंचे। एयरपोर्ट पर शुरुआती माहौल सहज और सामान्य दिखा, पीपीई, ग्लव्स, मास्क से मुस्तैद यात्री बाकायदा सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए बारी-बारी से एयरपोर्ट में प्रवेश करने के लिए लाइनों में लगे थे। लग रहा था जैसे पूरे माहौल पर कोरोना से जुड़ी ऐहतियात हावी हैं। सुबह-सुबह एयरपोर्ट पर जिस दुकान पर सबसे ज्यादा खरीदार दिखे वह मास्क, शील्ड और पीपीई किट बेचने वाला काउंटर था। जो यात्री एयरपोर्ट पर थे उनमें ज्यादातर स्टूडेंट्स, बुजुर्ग और छोटे बच्चे थे। दूसरे यात्रियों से बातचीत के बाद यह मालूम होने लगा कि महाराष्ट्र, झारखंड, पश्चिम बंगाल समेत गुजरात की उड़ानें आज रवाना नहीं हो रही हैं। इन्हीं सबसे से जूझते यात्री अपनी फ्लाइटों की रीशेड्यूलिंग के लिए पूछताछ काउंटरों पर जमा होने लगे। यात्री हताश और निराश हैं, दूर-दूर से सवेरे की शुरुआती उड़ानों के लिए तैयारी कर पहुंचे पैसेंजरों की मदद के नाम पर एयरलाइंस बस इतना कर रही हैं कि उन्हें डिले सर्टिफिकेट पकड़ा रही है जिनके आधार पर वे अपना पैसा वापस ले सकते हैं। लोग अपना सा मुंह लेकर लौटने लगे हैं, एयरपोर्ट परिसर में ही ऊंघते, ऊबते और हलकान-परेशान पैसेंजरों को देखा जा सकता है। आज की ताज़ा ख़बरें पढ़ने के लिए दैनिक भास्कर ऍप डाउनलोड करें सोमवार अल सुबह दिल्ली एयरपोर्ट पर अपनी फ्लाइट का शेड्यूल देखते लोग। 62 दिन बाद उड़ानें शुरू होने के बावजूद भी एयरपोर्ट पर भीड़ नहीं दिखी। May 25, 2020 at 07:32AM https://bit.ly/3cIFTR6

अब करोना को मेरे मुल्क से गारत कर दे, नफरतें खत्म हो फिर से वही भारत कर दे: 4 मशहूर शायरों ने दिया उम्मीद का पैगाम दुनिया की हर जुबांकोरोना के डर से सहमी है। मीठी ईद का मुबारक मौका है, लेकिन एकमायूसी चढ़ बैठीहै। दिल भी मजबूर है और कदम भी। ऐसे माहौल में कुछ अच्छा सोचने और करने की ज़िद लिए हम एक साथ लाएं हैं चार शायर और दो थीम। दैनिक भास्कर के लिए मीठी ईद पर'उम्मीद का चांद' और 'इस बार गले नहीं, दिल मिलाएं' थीम पर चार मशहूर शायरमुनव्वर राणा, शकील आजमी, मनोज मुंतशिर और मदन मोहन दानिशने अपनी कलम सेदिल के जज़्बात साझा किए हैं। हमने इन्हें वीडियो की शक्ल दी है ताकि दिमाग में एक तस्वीर बनें, शायद इन लफ्जों से थोड़ी उम्मीद बंध सके। नीचे इन चार शायरों कोदेखें-सुनें और पढ़ें, ईद मुबारक । मुनव्वर राणा का कलाम :"कच्ची मिट्टी की ईदगाह" ईद गाहें कभी वीरान नहीं होती हैं मस्जिदें भी कभी खाली नहीं होने पातीं हम नहीं होंगे जहां पर तो फरिश्ते होंगे बा जमाअत वो खड़े होंगे नमाजों के लिए अपनी आंखो में लिए रहम के ढेरों आंसू ये वो आंसू हैं कि जिनका नहीं होता मजहब ये वो आंसू हैं जो मजहब की किताबों में मिलें ये वो आंसू हैं जो सीनों में दुआ भरते हैं ये वो आंसू हैं जो संतो में शिफा भरते हैं ईद के दिन भी नहीं रोए कहीं भी बच्चे न लिपिस्टिक की दुआएं न तो पावडर न क्रीम नन्हे नन्हे से ये बच्चे भी दुआ मांगते हैं अब करोना को मेरे मुल्क से गारत कर दे नफरतें खत्म हो फिर से वही भारत कर दे अबकी रमज़ान दुआओं के सहारे गुज़रा नन्हें बच्चों के भी होंठो पे दुआ है अबकी कोई बच्चा नहीं रोया किसी कपड़े के लिए शौक की एक भी सीढ़ी से न उतरे बच्चे उनके तो सिर्फ दुआओं के लिए हाथ उठे मुल्क के वास्ते बस अम्न की दौलत मांगी अपने अल्लाह से रो रो के मुहब्बत मांगी नफरतें दूर हों "भारत"से हिफाज़त मांगी शकील आजमी की शायरी: आसमान पर ये जो निकला आज ईद का चाँद है कोरोना से हम निकलेंगे इस उम्मीद का चाँद है आओ मोहब्बतों के नए गुल खिलाएं हम इस ईद पर गले न मिलें दिल मिलाएं हम मनोज मुंतशिर की नज़्म नयी उम्मीद से हम ईद की ख़ुशियाँ मनाएँगे गले हर साल मिलते हैं हम अब के दिल मिलाएँगे हमें ऐ चाँद तू भी आसमाँ से देखते रहना बुझे हैं आज तो क्या, कल दोबारा जगमगाएँगे.. गले हर साल मिलते हैं हम अब के दिल मिलाएँगे..!!! मदन मोहन दानिश के जज़्बात उम्मीदों का चाँद है ये ,रहमत का इशारा भी भाग जगे इस बार तुम्हारा और हमारा भी बेशक गले न लग पाएं लेकिन दिल की धुन पर एक साथ गाए सारंगी और इकतारा भी आज की ताज़ा ख़बरें पढ़ने के लिए दैनिक भास्कर ऍप डाउनलोड करें Eid 2020 wishes of new hope and positivity by famous poet and lyricist of India, including Munawwar Rana, shakil azami, manoj muntashir and madan mohan danish May 25, 2020 at 07:00AM https://bit.ly/3cIFTR6

24 घंटे में रिकॉर्ड 7 हजार से ज्यादा संक्रमित बढ़े; महाराष्ट्र में मरीजों का आंकड़ा 50 हजार के पार, पूर्व सीएम अशोक चव्हाण भी पॉजिटिव देश में कोरोना संक्रमितों की संख्या 1 लाख 38हजार 533हो चुकी है। रविवार को देशभर में रिकॉर्ड 7हजार 110संक्रमितमिले और3283 मरीज स्वस्थ भी हुए। उधर,महाराष्ट्र में भी 24 घंटे में सबसे ज्यादा 3041 नए मरीज सामने आए।पूर्व मुख्यमंत्री और मौजूदा सरकार में मंत्रीअशोक चव्हाण की कोरोना रिपोर्ट भी पॉजिटिव आई। राज्य में अब संक्रमितों की संख्या 50 हजार के पार हो गई है। देशमें कोरोना मरीजों के ठीक होने की दर बढ़कर 41.28% हो गई है। तमिलनाडु में 765, दिल्ली में 508, गुजरात में 394, मध्यप्रदेश में 294, राजस्थान में 286, उत्तरप्रदेश में 251,प. बंगाल में 208, बिहार में 180, कर्नाटक 130 और उत्तराखंड़ में 73रिपोर्ट पॉजिटिव आईं। बीते 24 घंटे में 439 संक्रमित और बढ़े हैं, लेकिन ये किन राज्यों से हैं इसकी जानकारी नहीं मिल सकी है। ये आंकड़े covid19india.org और राज्य सरकारों से मिली जानकारी के आधार पर हैं। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक, देश में 1 लाख 31 हजार 868 संक्रमित हैं। इसमें से 73 हजार 560 का इलाज चल रहा है, 54 हजार 440 ठीक हुए हैं और 3867 की मौत हुई है। सशस्त्र बलों में 60% संक्रमित जवान स्वस्थ हुए केंद्रीय सशस्त्र बलों में 15 दिन के भीतर संक्रमण के मामले दोगुना होकर 1180 हो गए। हालांकि, कोरोना से सबसे ज्यादा रिकवरी रेट सशस्त्र बलों के जवानों का ही है। अब तक 60% जवान कोरोना को मात दे चुके हैं। बीएसएफ के 400 से ज्यादा संक्रमितों में से 286 ठीक हो गए।इसी तरह सीआरपीएफ में 359 केस मिले, इनमें से 220 स्वस्थ हो गए। इस बल में 2 मरीजों की जान गई। इसके अलावा सीआईएसएफ के 184 में से 116, आईटीबीपी के 189 में से 121, एसएसबी के 41 में से 9 जवानों ने कोरोना को हराया। 5 दिन जब सबसे ज्यादा मामले तारीख केस 23 मई 6665 22 मई 6570 19 मई 6154 21 मई 6025 20 मई 5547 5 राज्य और 1 केंद्र शासित प्रदेश का हाल मध्यप्रदेश, संक्रमित- 6665:यहां रविवार को 294 नए मामले सामने आए और 9 लोगों की जान गई। बुरहानपुर में 58,भोपाल में 50, इंदौर में 75, उज्जैन में 22,नीमच में 30 और जबलपुर में 10 मरीजों की रिपोर्ट पॉजिटिव आई। इंदौर मरीजों की संख्या के लिहाज से देश में सातवें नंबर पर पहुंच गया है। यहां कुल 3008संक्रमित हैं। महाराष्ट्र, संक्रमित- 50231:यहां रविवार को रिकॉर्ड 3041 नए मरीज मिले और 58 संक्रमितों ने दम तोड़ा। प्रदेश में सबसे ज्यादा 1196 लोग ठीक भी हुए। आज सामने आए नए मरीजों में 87 पुलिसकर्मी हैं।राज्य में 4 लाख 85 हजार 623 लोगों को घरों में और 33 हजार 545 लोगों को अन्य स्थानों पर क्वारैंटाइन किया गया है। उत्तरप्रदेश, संक्रमित- 6268:यहां रविवार को 251 लोगों की रिपोर्ट पॉजिटिव आई और 6 मरीजों ने जान गंवाई।पिछले 6दिन में 1200 से ज्यादा मरीज बढ़े हैं। अचानक यह बढ़ोतरी प्रवासी मजदूरों की वजह से हुई। शनिवार तक राज्य में 1423 प्रवासी संक्रमित पाए गए। फिरोजाबाद, अलीगढ़ और बुलंदशहर में 1-1मौत हुई। इसके साथ ही राज्य में इस बीमारी से मरने वालों का आंकड़ा 161हो गया। राजस्थान, संक्रमित- 7028:यहां रविवार को 286संक्रमित बढ़े। इनमें जयपुर में 78, नागौर में 47, जोधपुर में 35, राजसमंद में 24, अजमेर में 22,उदयपुर में 21 जबकि बाड़मेर, भीलवाड़ा और भरतपुर में 6-6 पॉजिटिवमिले। जयपुर, पाली औरचित्तौड़गढ़ में एक-एकसंक्रमित की मौत भी हुई। राज्य में मरने वालों काआंकड़ा 163होगया है। दिल्ली, संक्रमित- 13418:यहां रविवार को 508 मरीजों कीकोरोना रिपोर्ट पॉजिटिव आई और 30 लोगों ने दम तोड़ा। तिहाड़ जेल में एक कर्मचारी भी संक्रमित मिला। राजधानी मेंबीते 5 दिन से रोजाना500 से 600 संक्रमित बढ़ रहे हैं। केजरीवाल सरकार ने 117 निजी अस्पतालों को 20% बेड कोरोना मरीजों के लिए रिजर्व रखने के लिए कहा है। बिहार, संक्रमित- 2574:यहां रविवार को 180कोरोना संदिग्धों की रिपोर्ट पॉजिटिव आई। इनमें से कटिहार में 38, बांका में 20,रोहतास और पूर्वी चंपारणमें 11-11, बेगूसराय में 9, मुंगेर में 6, मधुबनी, गोपालगंज और नालंदामें 3-3, खगड़िया, भागलपुर, बांका और औरंगाबाद में 2-2, जबकि जेहानाबाद, नवादा और अरवल में 1-1 मरीज मिला। आज की ताज़ा ख़बरें पढ़ने के लिए दैनिक भास्कर ऍप डाउनलोड करें Coronavirus | Mumbai Delhi Coronavirus News | Coronavirus Outbreak India Cases LIVE Updates; Maharashtra Pune Madhya Pradesh Indore Rajasthan Uttar Pradesh Haryana Bihar Punjab Novel Corona (COVID-19) Death Toll India Today May 25, 2020 at 06:47AM https://bit.ly/3cIFTR6

रमजान के महीने में ही रोजे रखने का है कुरान से रिश्ता, खास कारण से कहा जाता है इसे मीठी ईद ईद रोजे पूरे होने के जश्न का दिन है। 30 दिन तक रोजेदार पूरे इमान से रोजे के कायदों को जीता है, 31वें दिन अल्लाह को रोजे पूरे होने का शुक्रिया करने के लिए ईद पर मुंह मीठा करता है। लेकिन, इस्लाम को ना जानने वाले या कम जानने वालों के मन में कई तरह के सवाल होते हैं। रमजान का महीना ही क्यों चुना गया रोजे के लिए, 30 दिन ही रोजे क्यों रखे जाते हैं, क्या रमजान के महीने का कुरान लिखे जाने से कोई संबंध है? ऐसे ही कुछ सवालों के जवाब के लिए हमने अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर प्रो. आफताब आलम, जामिया मिलिया इस्लामिया के इस्लामिक स्टडीज के प्रो. जुनैद हारिस, जामिया मिलिया इस्लामिया के उर्दू विभाग के हेड डॉ. शहजाद अंजुम, मुस्लिम मामलों के जानकार डॉ. महमूम हुसैन आदि से चर्चा की। रमजान के महीने में ही रोजे क्यों? रमजान हिजरी वर्ष का नौवां महीना है। इस्लाम में इसकी सबसे ज्यादा मान्यता इसलिए है क्योंकि रमजान के महीने में पैगंबर मोहम्मद सा. को कुरान की आयतें उतरना शुरू हुईं। रोजे की परंपरा पैगंबर साहब के पहले भी मानी गई है। खुद पैगंबर साहब ने भी रोजे रखे। लेकिन, तब ये फर्ज (अनिवार्य) नहीं थी। जब पैगंबर साहब मक्का से मदीना आए। तब उन्होंने इसे हर इस्लाम मानने वाले के लिए इसे फर्ज किया। ये भी माना जाता है कि उन्होंने ही रोजे के साथ कुछ नए नियम जोड़े, जिसमें जकात (दान) सबसे महत्वपूर्ण है। तब से रमजान के पूरे महीने रोजे रखना हर इस्लाम मानने वाले के लिए जरूरी हो गया। 30 दिन ही रोजे क्यों? रमजान के महीने में 30 दिन रोजे रखना ये कुरान शरीफ की भी हिदायत है। पैगंबर साहब का कहना था कि साल के 12 में से 11 महीने हम दुनियादारी में जीते हैं। खुद की बेहतरी के लिए समय नहीं निकालते। रमजान के पूरे महीने (30 रोजे) इसके लिए फर्ज किए गए हैं। खुद को बेहतर बनाने, दुनियादारी से अलग खुद को नेकी की राह पर चलाने और लोगों की मदद करने के लिए इस एक महीने को चुना गया है। इसमें अपनी आमदानी का ढाई फीसदी जकात (दान) करने का कायदा बनाया गया है। रोजा सिर्फ खाने से दूर रहने का नहीं है, बल्कि सोच, कर्म और हर तरह से अपनी शुद्धता के लिए है। मदीना जहां कुरान शरीफ को अंतिम रूप दिया गया था। यहीं पर पैगंबर साहब ने 10 साल गुजारे थे। इस्लाम में मक्का-मदीना की यात्रा ही सबसे बड़ी यात्रा मानी जाती है। सेहरी और इफ्तारी क्यों होती है? इसका मतलब क्या? रोजा सूरज उगने के सवा घंटे पहले से शुरू होता है। सूरज ढलने के साथ खत्म होता है। सूरज उगने से पहले और सूरज ढलने के बाद ही कुछ खा सकते हैं या पी सकते हैं। सूरज उगने से पहले अल-सुबह जो खाया जाता है, उसे सेहरी कहा जाता है। शाम को सूर्यास्त के बाद रोजा खोला जाता है। इसे इफ्तारी यानी रोजा पूरा होने की रस्म कहा जाता है। आमतौर पर रोजा खजूर खाकर ही तोड़ा जाता है। सेहरी और इफ्तारी के बीच ना पानी पिया जाता है, ना कुछ खाया जाता है। ये कड़ा नियम खुद को नेकी की राह पर चलाने और नेक कामों के लिए तैयार रहने की एक सीख (ट्रैनिंग) के जैसा है। क्या रमजान का कुरान लिखे जाने से कोई संबंध है? हां, रमजान के महीने में ही कुरान की आयतें पैगंबर साहब को नाजीर (मिली) हुई थीं। हालांकि, पूरे रमजान के महीने में ऐसा नहीं हुआ था। रमजान के आखिरी दस दिनों की खास तारीखों को कुरान की आयतें उतरी थीं। ये तारीखें 21, 23, 25, 27 और 29 तारीखें थी। इस लिहाज से ही रमजान को इस्लाम में सबसे पवित्र महीना माना गया है। कुरान को पूरा होने में 23 साल का समय लगा था। इन 23 सालों में 13 साल पैगंबर मोहम्मद सा. मक्का और 10 साल मदीना में रहे थे। इन 23 सालों में कुरान की सारी आयतें उतरीं। इसकी शुरुआत तब हुई जब पैगंबर सा. खुद 40 साल के थे। उन्होंने खुद को इसी उम्र में पैगंबर (अल्लाह का संदेशवाहक) घोषित किया था। ये घटना मक्का में हुई थी। इसके 13 साल बाद वे मदीना आ गए थे। पवित्र मक्का, जो पैगंबर मोहम्मद साहब का जन्म स्थान भी माना जाता है। यहीं पर उन्होंने खुद को नबी घोषित किया था। इसे मीठी ईद क्यों बोलते हैं और यह बकरीद से अलग क्यों होतीहै? 30 दिन के रोजे पूरे होने की खुशी में ईद मनाई जाती है। ये वो उत्सव है, जिसमें रोजे रखने वाला अल्लाह को शुक्रिया अदा करता है। अपने रोजे पूरे होने की खुशी में मीठा खाता है। इस्लामिक साहित्य के शोधकर्ता ये भी मानते हैं कि खुद पैगंबर मोहम्मद सा. भी रोजे खत्म होने के बाद नमाज के लिए जाने से पहले खजूर खाकर अपना मुंह मीठा करते थे, फिर नमाज के लिए जाते थे। यहीं से इसका नाम मीठी ईद पड़ गया। बकरीद, मीठी ईद के 70 दिन बाद आती है। ये कुर्बानी का त्योहार है। इसके पीछे एक अलग कहानी है। बकरीद की शुरुआत इस्लाम के एक और पैगंबर हजरत इब्राहिम से हुई। ऐसी मान्यता है कि हजरत इब्राहिम को सपने में अल्लाह ने उससे सबसे प्रिय चीज की कुर्बानी देने के लिए कहा तो उन्होंने अपने बेटे की ही बलि देने का फैसला किया। ऐसा करते हुए कहीं उनके हाथ रुक न जाएं, इसलिए उन्‍होंने अपने आंखों पर पट्टी बांध ली। बलि देने के बाद जब उन्‍होंने पट्टी खोली तो देखा कि उनका बेटा तो उनके सामने जिंदा खड़ा था और जिस की बलि दी गई थी वो बकरी, मेमना, भेड़ की तरह दिखने वाला जानवर था। इसी दिन से इसे त्‍योहार के रूप में मनाया जाने लगा और इसका नाम बकरीद पड़ गया। आज की ताज़ा ख़बरें पढ़ने के लिए दैनिक भास्कर ऍप डाउनलोड करें Eid 2020 Eid Mubarak Keeping fast in the month of Ramadan is a relationship with the Quran, for special reason it is called sweet Eid May 25, 2020 at 06:00AM https://bit.ly/3cIFTR6