आपबीती: कोई पैसे न होने की वजह से जा रहा था घर तो किसी के दो बच्चे हैं घायल; अब सबको सता रही घर पहुंचने की चिंता

चूने के बोरियों के नीचे से मैले कुचले कपड़ों में दबे हुए लोग मजबूरी की मौत मारे गए हैं। चुने से नहाये घायलों को याद ही नहीं उनके साथ ये हादसा कैसे हुआ है। 24 लोगों की मौत के बाद भी सिसकियां थमने का नाम नहीं ले रही हैं। किसी का बच्चा एडमिट है तो किसी का का साथी गुम है। किसी को 7 घंटे बाद होश आया तो पता चला कि हड्डियों में काफी दर्द है। औरैया के जिला अस्पताल और सैफई पीजीआई में घायलों को एडमिट किया गया है। हम आपके लिए लाये हैं ऐसी तीन कहानियां जो हादसे में बचे घायलों ने अपनी जुबानी बतायी हैं।

पहली कहानी: ठेकेदार पैसे देने के बजे गाली देता था इसलिए राजस्थान से भाग आये

अस्पताल में भर्ती शम्भु ने अपनी आपबीती सुनायी।
अस्पताल में भर्ती शम्भु ने अपनी आपबीती सुनायी।

शम्भू को अपने घर झारखंड जाने के लिए तकरीबन 1400 किमी का सफ़र तय करना है।राजस्थान से औरैया तक अभी उसने आधी से भी कम दूरी तय की है और उसके साथ भयानक हादसा हो गया है। शम्भू कहता है कि 'हड्डियों में दर्द हो रहा है. मुझे हादसे के बाद अभी होश आया है। आगे बात करने पर कहता है कि राजस्थान में मैं 2 साल मार्बल कंपनी में काम कर रहा था।पिछले महीने ठेकेदार ने पैसे भी नहीं दिए। जो कुछ बचा खुचा था उसी से खर्च चल रहा था। जब हमारे साथी आने को तैयार हुए तो हम भी तैयार हो गए। अभी दो दिन पहले ही हम राजस्थान से निकले थे।तकरीबन सौ-सवा सौ किमी पैदल चले तो पुलिस ने पकड़ लिया. वहां मीडिया वाले भी आ गए थे तो खाना खिलाकर हमें बस में बिठा दिया गया। झांसी से पहले हमें उतार दिया गया।वहां से हम और हमारे साथ तकरीबन 50 से 60 लोग इस ट्रक पर सवार हुए। ट्रक वाले को झारखंड तक पहुँचाने के भी पैसे दिए थे। रात करीब 3 से 4 के बीच हम लोग ट्रक पर थे और ट्रक खड़ा हुआ था तभी पीछे से किसी ट्रक ने टक्कर मर दी और हम लोग बोरियों के नीचे दब गए। इसके बाद मुझे याद नहीं। अभी अस्पताल में मुझे होश आया है। मेरे साथ गाँव के बगल का एक साथी था वह मुझे कहीं दिखाई नहीं दे रहा है। 21 वर्षीय शम्भू बताता है कि झारखंड में उसके भाई और माता पिता रहते हैं। महीने की 8 हजार की पगार से उन्हें 4 से 5 हजार रूपए भेज दिया करता था अब वह भी बंद है।शम्भू को चिंता है कि वह अब आगे घर कैसे पहुंचेगा. साथ में जो थोडा बहुत सामान था वह भी गायब है।

दूसरी कहानी: अचानक तेज अवाज हुई और हम चूने की बोरियों के नीचे दब गए

धनंजय को आंख में चोट आयी है। इन्हें भी अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
धनंजय को आंख में चोट आयी है। इन्हें भी अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

औरैया से सैफई मेडिकल कॉलेज आये धनंजय के खून सने सिर पर पट्टी बंधी हुई है। चेहरे पर मास्क लगा हुआ है। दर्द की वजह से हाथ टेढा मोड़ा हुआ है। धनंजय बताते हैं कि, मैं राजस्थान में मार्बल कंपनी में काम करता हूं। लॉकडाउन की वजह से काम बंद हो गया था। पैसे भी मिलने बंद हो गए थे। हमने पहले अप्रैल में निकलने की कोशिश की थी लेकिन हमें निकलने नहीं दिया गया काफी सख्ती की वजह से हम डर गए थे। ठेकेदार हमारी सुन नहीं रहा था तो अब हम झारखंड घर जाने के लिए निकले थे। घर में मां और बाबू जी है। अब मुझे चिंता हो रही है कि उन्हें कैसे पता चलेगा। मेरी तबियत ठीक नहीं है। धनंजय बताते हैं कि हम लोग ट्रक पर सो रहे थे कि अचानक से तेज आवाज आई। आंख खुली तो हम चुने की बोरियों के नीचे दबे हुए थे। हमारा दम घुट रहा था और हम बेहोश हो गए।

तीसरी कहानी: इस मां के दो बच्चे एडमिट हैं

मां क्रांति देवी की गोद में बैठी बच्ची।
मां क्रांति देवी की गोद में बैठी बच्ची।

मां की गोद में बैठी बच्ची सहमी है। मां सिसकियां भर रही है। उसके दो बच्चे घायल हैं और सैफई पीजीआई में एडमिट हैं। क्रांति देवी अस्पताल के बाहर बैठकर बच्चों के लिए प्रार्थना कर रही है। बताती है कि उनके साथ पति, देवर और तीन बच्चे हैं। पति और देवर बच्चों की तीमारदारी में लगे हुए हैं।क्रांति कहती है कि दिल्ली में रहती है और उन्हें छतरपुर जाना है। दिल्ली से गाजियाबाद तक हम लोग पैदल पहुंचे हैं जबकि ट्रक उन्हें झाँसी में मिला। बड़ी मिन्नतों के बाद हम लोग ट्रक में बैठ पाए थे। अब मेरे बच्चों का क्या होगा यह चिंता खाए जा रही है। क्रांति बोली कि हम बच्चों को लेकर सो रहे थे तभी टक्कर हुई। हमें कुछ याद नहीं। जब आँख खुली तो हम सही सलामत थे। तीनो बच्चे अगल बगल ही गिरे थे। दो बच्चों को खून निकल रहा था। हम घबराये हुए थे लेकिन पुलिस वालों ने हम सबको एम्बुलेंस से इस अस्पताल में भेज दिया। क्रांति आगे कुछ बताती उससे पहले उनके पास अंदर से डॉक्टर का बुलावा आ गया।



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औरैया में शनिवार को हुए हादसे में 24 लोगों की मौत हो गई। इस हादसे में घायल हुए कुछ लोगों ने अपनी जुबानी ही पूरे हादसे की कहानी बयां की है।


source https://www.bhaskar.com/local/uttar-pradesh/news/auraiya-up-accident-update-migrant-workers-victims-on-after-24-labourers-killed-in-road-accident-127307519.html

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