15 साल के बीमार बेटे को चारपाई पर लेकर तय की 800 किलोमीटर की दूरी, हालत देख भावुक हुए थाना प्रभारी ने वाहन की व्यवस्था कर भिजवाया गांव

उन में प्रवासी मजदूरों का पालायन जारी है। नेशनल हाइवे पर अपने घरों को लौट मजदूरों की लंबी कतार देखी जा सकती है। इन कतारों के बीच कुछ मानवीय संवेदनाओं को झकझोर देनी वाली तस्वीरें भी सामने आ जाती हैं। कुछ ऐसा ही नजारा कानपुर एनएच टू हाइवे पर देखने को मिला। एक परिवार 15 साल के बिमार बेटे को चारपाई पर लेटाकर दो कंधों के सहारे 800 किलोमीटर की दूरी तक करके कानपुर पहुंचा था। यह परिवार बिमार बेटे को लेकर लुधियाना से मध्यप्रदेश के सिंगरौली गांव के लिए निकला था।

मध्य प्रदेश के सिंरौली गांव में रहने वाले राजकुमार लुधियाना में परिवार समेत रहते थे। पूरा परिवार मजदूरी करता था। लॉकडाउन के बाद से परिवार के सामने रोटी का संकट खड़ा हो गया। राजकुमार ने परिवार समेत मध्यप्रदेश अपने गांव लौटने का फैसला किया। लेकिन उनके सामने सबसे बड़ी समस्या थी कि उनका 15 वर्षीय बेटा गर्दन में चोट के कारण चलने में असमर्थ था। उसे पैदल लेकर कैसे चला जाए, इतनी लंबी दूरी बिमार बेटे को लेकर किस तरह से पूरी की जाएगी।

राजकुमार ने फैसला किया कि बेटे को चारपाई पर लिटाकर गांव तक ले जाएगें। उन्होंने चारपाई के चारों कोनों पर रस्सी बांधी और उसे एक बांस के जोड़ दिया। जिससे कि दो कंधों के सहारे चारपाई को उठाया जा सके। राजकुमार के इस साहस को देखर के उनके ही गांव के रहने वाले अन्य लोग भी वापस लौटने के लिए तैयार हो गए। राजकुमार के परिवार समेत कुल 18 लोग पैदल ही निकल पड़े।

हाई वे पर जाता देख पुलिसकर्मियों ने की मदद

हाईवे पर पैदल जाते देख वहां तैनात पुलिसकर्मियों ने पूछताछ की। जानकारी होने पर उन्हें पानी और खाने की व्यवस्था करवायी।
हाईवे पर पैदल जाते देख वहां तैनात पुलिसकर्मियों ने पूछताछ की। जानकारी होने पर उन्हें पानी और खाने की व्यवस्था करवायी।

रामादेवी नेशनल हाइवे पर एक मजदूरों का जत्था जाते हुए दिखा। जिसमें एक बच्चे को चारपाई पर लिटाकर उसे दो कंधों के सहारे लेकर जा रहे थे। वहां मौजूद पुलिसकर्मियों और अन्य लोगों ने उन्हें रोका। उनको पानी पीने को दिया और लंच पैकेट खाने को दिया।

राजकुमार ने बताया कि साहब हम सभी को मध्यप्रदेश के सिंगरौली गांव जाना है। मेरे बेटे बृजेश की तबियत ठीक नहीं है उसके गर्दन समस्या है जिसकी वजह से चल नहीं सकता है। हम लोग बेटे को चारपाई में लिटाकर लुधियाना से आ रहे हैं। बारी-बारी से सभी लोग चारपाई उठाकर चलते हैं। उन्होंने बताया कि लुधियाना से कानपुर की दूरी 800 किलोमीटर है। हम लोग पैदल ही चलकर आए हैं। किसी ने भी हमारी मदद के लिए हाथ नहीं बढाया। बल्कि किसी ने पूछा तक नहीं कि कहां जा रहे हो।

उन्होंने बताया कि कानपुर से हम लोग पैदल ही एमपी तक जाएगें। इस दौरान कुछ भी रास्ते में खाने को मिलता है वो खा लेते हैं। इसके अलावा यदि किसी ने लंच पैकेट दिया तो वो खाकर आगे बढ जाते हैं। थानाप्रभारी रामकुमार ने यह देखकर बहुत आहत हुए । उन्होने सभी को खाना खिलाया और तत्काल एक वाहन की व्यवस्था की और सभी को वाहन से उनके गांव तक भेजना का प्रबंध किया ।



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लॉकडाउन के बीच यह तस्वीर काफी भावुक कर देने वाली है। दरअसल यह एक मजूदर परिवार है जो लुधियाना से एमपी के लिए निकला है। वह कानपुर पहुंचा था जहां पुलिसकर्मियों ने इनकी मदद की और वाहन की व्यवस्था कर उन्हें गांव भिजवाया।


source https://www.bhaskar.com/local/uttar-pradesh/news/kanpur-coronavirus-lockdown-news-today-update-area-wise-may-16-news-127307437.html

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